जिन राज्यों में सूखा पड़ने की संभावना है उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार का उत्तर-पश्चिम हिस्सा, लद्दाख, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, झारखंड और आंध्र प्रदेश का तटीय इलाका शामिल हैं।
सर्दियों में नहीं हुई बारिश
इस बार सूखा पड़ने की इसलिए ज्यादा संभावना है क्योंकि सर्दियों में न के बराबर बारिश हुई है। जनवरी और फरवरी के महीने में 63 फीसदी कम बारिश हुई थी। वहीं मार्च और अप्रैल के महीने में 31 फीसदी बारिश कम हुई है। इस वजह से उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में ही सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा।
सरकार बताएगी कैसा रहेगा मॉनसून
अब तक के संकेतों के मुताबिक मौसम विभाग मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान जारी कर सकता है। मौसम विभाग से पहले प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट ने मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान जारी किया है। स्काईमेट के मुताबिक अभी तक संकेत अच्छी बारिश की संभावना दिखा रहे हैं। चीन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका की मौसम एजेंसियों ने भी सामान्य मॉनसून के संकेत दिए हैं। हालांकि स्काईमेट का अनुमान 2015 में गलत साबित हो चुका है।
अच्छी बारिश होने की संभावना अल-नीनो या ला-नीना कमोबेश सामान्य रहने के आसार हैं। बता दें कि समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने पर अल-नीनो कहलाता है और समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम रहने पर ला-नीना कहलाता है। अल-नीनो मॉनसून पर उल्टा असर डालता है। वहीं ला-नीना से ज्यादा बारिश होती है।