कॉरपोरेट करदाताओं की बात की जाए, तो 2014-15 में इस श्रेणी के करदाताओं ने जहां औसतन 32.28 रुपये का कर चुकाया था, वहीं आकलन वर्ष 2017-18 में यह 55 प्रतिशत बढ़कर 49.95 लाख रुपये हो गया। सीबीडीटी ने कहा कि इस अवधि में व्यक्तिगत करदाताओं द्वारा किए गए औसत कर भुगतान का आंकड़ा 26 प्रतिशत बढ़कर 46,377 रुपये से 58,576 रुपये हो गया।
सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि ईमानदार करदाताओं का सम्मान और उनकी हमेशा मदद की जाए। वहीं कर चोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी और अभियोजन कार्रवाई की जाएगी।
चंद्रा ने कहा कि देश के कुल राजस्व में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा सबसे अधिक है। यह फिलहाल 52 प्रतिशत है। सीबीडीटी ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में कर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 3.31 करोड़ थी, जो 2017-18 में 65 प्रतिशत बढ़कर 5.44 करोड़ हो गई।
सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चन्द्रा का कहना है कि आयकर विभाग ने कानून में सुधार, सूचना के प्रसार और सख्ती से नियमों का पालन करवाने के लिए कई कदम उठाए। इस वजह से रिटर्न दाखिल करने वालों और टैक्स भरने वालों की संख्या बढ़ी।