देश में 1 अप्रैल, 2020 बीएस-6 मानक लागू हो रहा है। इसके बाद बीएस-4 मानक के वाहनों की न तो बिक्री होगी और न ही इनका पंजीकरण होगा। उधर, मोटर वाहन में सुस्ती से वाहनों की बिक्री घट गई है। ऐसे में उद्योग जगत ने सरकार से पुरानी इंवेट्री बेचने को कुछ अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई है। उद्योग जगत की स्थिति और सरकार की नीति पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से बातचीत की। पेश है अंश :
बीएस-6 लागू करने का उद्देश्य कार्बन उर्त्सजन में कमी लाना है। इस पर हम आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमें पर्यावरण को स्वच्छ रखना है। लेकिन, उद्योग जगत की बात भी सुनी जाएगी। उनका कहना भी सही है कि मोटर वाहन उद्योग में सुस्ती से उनकी इन्वेंट्री बढ़ रही है। जाहिर है कि वे उसे बेचेंगे ही, गोदाम में तो रखेंगे नहीं। मोटर वाहन उद्योग की जायज मांगें स्वीकार की जाएंगी। लेकिन, उन्हें भी समझना होगा कि हम इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इसे लागू करने की समय-सीमा में कोई ढील नहीं दी जाएगी और न ही इस संबंध में अभी कोई फैसला हुआ है।
ई-वाहन की ओर जो कदम उठाए जा रहे हैं, उसका उद्देश्य भी वातावरण को साफ और स्वच्छ रखना है। लेकिन, जहां तक मेरी जानकारी है, अभी इस बारे में कोई नीति बनी नहीं है। अभी यह कंसल्टेशन प्रॉसेस से ही गुजर रहा है। यदि कोई नीति बनाई जाएगी तो इस संबंध में उद्योग जगत की बातें भी सुनी जाएंगी।
देश में एक बार जब ई-वाहनों का निर्माण तेजी से होने लगेगा तो उसके लिए जरूरी बैट्री एवं कलपुर्जे भी नहीं बनने लगेंगे। वर्तमान में इसकी बैट्री यहां नहीं बन रही है, लेकिन इसके घरेलू स्तर पर निर्माण के लिए कई कंपनियां प्रयासरत हैं। वे देश में ही बैट्री निर्माण के लिए संयंत्र लगा रहे हैं।
आपने सही कहा... हमारे पास सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया नाम की एक कंपनी है। लेकिन यह सही तरीके से चल नहीं रही है। इसके 10 में से सात यूनिटें बंद हैं। महज तीन यूनिटों में ही काम हो रहा है। अभी तो मैंने कार्यभार संभाला है। देखता हूं कि इस दिशा में कैसे बेहतर तरीके से काम हो सकता है। मेरा तो स्पष्ट मानना है कि बदलती दुनिया के अनुरूप नई तकनीक अपनाने पर बल देना चाहिए। इसके अलावा हम इस दिशा में भी काम कर रहे हैं कि तेजी से रोजगार के अवसर कैसे सृजित हों।
ढांचागत संरचना तैयार करने का काम चल रहा है। आपको मालूम होगा कि भारी उद्योग मंत्रालय ने ई-वाहन को बढ़ावा देने के लिए फेन यानी ‘फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स’ की शुरुआत की है। इसका पहला चरण पूरा हो गया है। दूसरे चरण पर काम शुरू हो गया है। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसमें ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने पर काफी ध्यान दिया गया है।