कर्ज की ब्याज दरें तय करने में अब बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अन्य सभी विनियमित वित्तीय संस्थानों की मनमानी नहीं चलेगी। एक ही नियम से इन संस्थानों में अब कर्ज की ब्याज दरें तय होंगी। इसके लिए आरबीआई ने नियमों में एकरूपता और मानकीकरण लाने का प्रस्ताव पेश किया है।
22 साल बाद फिर से मिलेंगे नए शहरी सहकारी बैंक खोलने के लिए लाइसेंस
शहरी इलाकों में करीब 22 साल के बाद फिर से नए सहकारी बैंक खुल सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने ऑन-टैप (किसी भी समय आवेदन की खुली व्यवस्था) आधार पर दोबारा नए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर 2004 से लगी रोक हटाने का फैसला किया गया है। इस संबंध में मसौदा दिशानिर्देश जल्द जारी होंगे।
इसलिए हटी रोक
दो दशकों में शहरी सहकारी बैंकों को लेकर नियमन मजबूत हुआ है। गवर्नेंस और आर्थिक इंडिकेटर्स के मोर्चे पर इनका प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
आवेदन की योग्यता
अच्छी पूंजी वाली कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ही यूसीबी बन सकेंगी। आवेदकों के पास बीते वित्त वर्ष की 31 मार्च तक 300 करोड़ की पूंजी होनी चाहिए। लाइसेंस मिलने के समय शुद्ध एनपीए 3 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
आम यूजर्स पर यूपीआई का नहीं लगेगा शुल्क...
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, यूपीआई लेनदेन में मर्चेंट शुल्क का बोझ आम यूजर्स पर नहीं डाला जाएगा, लेकिन डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत किसी न किसी को चुकानी होगी। सरकार अभी इस विषय पर विचार कर रही है।
वृद्धि दर का अनुमान 6.7%
चुनौतियों के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर अनुमान को 6.6 से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। आरबीआई ने कहा, भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
केंद्रीय बैंक ने अनुमानों में संशोधन कर बनाया संतुलन
आरबीआई के चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाने और महंगाई का अनुमान घटाने के पीछे रणनीतिक वजह नीतिगत दरों को लंबे समय तक 5.25 फीसदी पर स्थिर रखना है। महंगाई अनुमान घटाने से भविष्य में दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा, वहीं वृद्धि दर बढ़ाने से रेपो रेट घटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे अर्थव्यवस्था में संतुलन बना रहेगा।