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महंगे क्रूड और युद्ध के साये में शेयर बाजार: क्या सितंबर में जारी रहेगी तेजी? 5 साल का ट्रेंड इस बार कसौटी पर

Thu, 03 Sep 2026 06:01 AM IST
देवेश त्रिपाठी बोनस डेस्क, नई दिल्ली

सार

सितंबर में शेयर बाजार के पिछले प्रदर्शन से निवेशकों को सामान्यतः सकारात्मक संकेत मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने तस्वीर बदल दी है। निफ्टी अहम तकनीकी स्तर के नीचे बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी तेज गिरावट देखी गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी बाजारों की कमजोरी घरेलू बाजार पर दबाव बना रही है।
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क्या बदलेगा शेयर बाजार का मिजाज? - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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शेयर बाजार के पिछले 5 वर्षों के आंकड़े गवाही देते हैं कि सितंबर सीरीज आमतौर पर तेजी का दांव खेलने वालों के पक्ष में रहती है। केवल 2022 के अपवाद (3.5 फीसदी की गिरावट) को छोड़ दें, तो सितंबर में औसतन 2.5 से 3 फीसदी की बढ़त दर्ज होती रही है। वहीं ट्रेडिंग स्विंग के लिहाज से अगस्त के निचले स्तरों से सितंबर के अंत तक हर साल 4 से 5 फीसदी का ऊपरी कारोबार देखने को मिला है। 2021 और 2023 में 5 फीसदी और 2024 व 2025 में 4 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली थी। इसी आधार पर बाजार में 23,950 के आधार से तकनीकी बाउंस बैक (उछाल) और 24,200–24,250 तक के स्तर दिखने की उम्मीद बंधी थी।
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बुधवार को वैश्विक बाजार के दबाव और भू-राजनीतिक तनाव ने इस तकनीकी गणित की पहली परीक्षा ले ली। बुधवार को घरेलू बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। एनएसई निफ्टी 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 अंक पर बंद हुआ। यानी यह 23,950 के उस महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से ठीक नीचे फिसल गया, जिसे तकनीकी विश्लेषक स्टॉप लॉस मान रहे थे। बीएसई सेंसेक्स भी 373.93 अंक गिरकर 76,570.35 अंक पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह 808 अंक तक टूट गया था। एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एशियन पेंट्स जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली ने दबाव बढ़ाया।

कच्चा तेल और वैश्विक बिकवाली बड़ी बाधा
पुराने ट्रेंड के दोहराव की राह में सबसे बड़ी दीवार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते ब्रेंट कच्चा तेल नवंबर वायदा 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
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तेल की यह महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था और चालू खाते के घाटे के लिए सीधा खतरा है। एशियाई बाजारों में कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, हांगकांग का हैंग सेंग और चीन के बाजार लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से भी कोई राहत के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ऊर्जा संकट ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया है।

सकारात्मक फैक्टर जो बाजार को थाम रहे हैं
  • मजबूत एसआईपी इनफ्लो : रिटेल निवेशकों का भरोसा अडिग है। जुलाई महीने में ही रिकॉर्ड 31,961 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया है, जो घरेलू संस्थागत निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी करने की ताकत दे रहा है।
  • वायदा बाजार का प्रीमियम : कैश मार्केट में गिरावट के बावजूद, निफ्टी के सितंबर वायदा अभी लगभग 80 अंकों के मुनाफे (23,994 के आसपास) पर ट्रेड कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि निचले स्तरों पर पूरी तरह  से मंदी का मूड नहीं बना है।

इस माह बाजार का अनुमान
सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक अनुराग लाहिड़ी के मुताबिक, आईटी और एफएमसीजी जैसे भारी-भरकम शेयरों में कमजोरी के कारण इस महीने मुख्य सूचकांकों में किसी बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली िफर से शुरू हो गई है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से प्रदर्शन बेहतर की उम्मीद है। बाजार सीमित दायरे में ही रह सकता है।

लंबी अवधि में चार प्रमुख शेयरों में मौका
सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट मुदित गोयल ने कहा, बाजार में कमजोरी के बावजूद सेक्टोरल रोटेशन के आधार पर कुछ शेयरों में तकनीकी स्तर मजबूत बने हुए हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, पीएफसी और एमफैसिस प्रमुख हैं।  
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