रेलवे ने गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को मंजूरी दी (सांकेतिक)
- फोटो : एक्स@भारतीय रेलवे- अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत में उच्च लॉजिस्टिक्स लागत विनिर्माण और व्यापार की बड़ी रुकावट है। यह देश के जीडीपी का 13 से 14 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत 8 फीसदी है। रेल मंत्रालय ने इसे कम करने के लिए गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल नीति के तहत 45 नए टर्मिनल बनाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत देशभर में अबतक कुल 147 कार्गो टर्मिनल शुरू हो चुके हैं। इन टर्मिनलों के निर्माण पर करीब 3,600 करोड़ रुपये का निजी निवेश आएगा।
- लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक सभी 45 टर्मिनल 18 महीने में परिचालन में आ जाएं।
कमोडिटी हब और निजी उत्साह
इन कार्गो टर्मिनलों को जरूरत के हिसाब से विशेष कमोडिटी हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। निर्माण परियोजनाओं के लिए सीमेंट और स्टील के अलग टर्मिनल होंगे। पावर प्लांट्स तक कोयला सप्लाई के लिए थर्मल और कोल हब बनेंगे। कृषि क्षेत्रों के पास साइलो और कोल्ड-चेन वाले एग्री-लॉजिस्टिक्स टर्मिनल बनाए जाएंगे। जुलाई 2026 तक निजी कंपनियों से 543 आवेदन मिले, जिनमें से 345 को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।