दिवाली और त्योहारी सीजन के दौरान घरों में बनने वाली मिठाइयों, नमकीन और पकवानों के कारण चना दाल और बेसन की मांग में भारी तेजी देखने को मिली है, जिससे पिछले महीने चने की कीमतों में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लेकिन आम जनता के लिए राहत भरी खबर यह है कि त्योहार का यह दौर खत्म होते ही चने और अन्य दालों के भाव नीचे आने की पूरी संभावना है। सरकार के मुताबिक, बाजार में खरीफ दलहन की सप्लाई तेजी से बढ़ रही है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, त्योहारी सीजन के चलते मांग में अस्थायी उछाल आया था। चने का उपयोग विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और नमकीन बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में भी त्योहारों के दौरान चने की दाल की खपत काफी बढ़ जाती है। इन तमाम वजहों से मांग में तेजी आई, लेकिन त्योहार बीतने के बाद जैसे ही मांग सामान्य होगी, भाव भी नरम पड़ जाएंगे।
बाजार जानकारों का मानना है कि खरीफ सीजन की मूंग और उड़द की आवक बाजार में शुरू होने से दलहन की कुल उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिसका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर भी दिखाई देगा।
उत्पादन में शानदार बढ़त
कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में दलहन के मोर्चे पर स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। साल 2025-26 में चने का कुल उत्पादन 125.14 लाख टन रहने का अनुमान है। साल 2024-25 में यह उत्पादन 111.14 लाख टन था। इस तरह, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चने के उत्पादन में सीधे 14 लाख टन की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। भारत में चने की मुख्य पैदावार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात राज्यों में होती है।
प्रमुख दालों के खुदरा भाव
- चना दाल: ₹92.41 प्रति किलो
- अरहर दाल: ₹131.49 प्रति किलो
- उड़द दाल: ₹124.67 प्रति किलो
- मूंग दाल: ₹113.46 प्रति किलो
स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग, भाव 21 अक्तूबर तक