अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारी कराते एनएचएआई।
- फोटो : एनएचएआई
देशभर में खराब क्वालिटी के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनियों के खिलाफ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कड़ा रुख अपना लिया है। मंत्रालय के रडार पर देश की सात बड़ी निर्माण कंपनियां आ चुकी हैं, जिनके कामकाज की गहन जांच शुरू कर दी गई है। मंत्रालय ने साफ संदेश दिया है कि सड़क निर्माण में लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में एनएच-45ए (नया एनएच-32) के पुंडियानकुप्पम–सत्तनाथपुरम खंड पर सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया था और उसकी रिटेनिंग वॉल (सड़क के दोनों ओर की सुरक्षा दीवार) गिर गई थी।
उच्च स्तरीय जांच के बाद मंत्रालय ने 12 अक्तूबर को इसे विनाशकारी घटना करार दिया। इस गंभीर लापरवाही के चलते संबंधित निर्माण कंपनी को मंत्रालय के तहत आने वाली आगामी निर्माण परियोजनाओं में दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, कंपनी के पास अदालत जाने का विकल्प खुला है।
आपको बता दें कि यह चार लेन का प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युइटी मोड के तहत 2,120.40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था।
देहरादून और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर भी उठे सवाल
हाल ही के दिनों में देहरादून और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़कों में गड्ढे होने और निर्माण में खामियों की खबरें सामने आई थीं। शुरुआती जांच में इन मामलों में डिजाइन की खामियों की बात सामने आ रही है, जिसके बाद मंत्रालय ने इन प्रोजेक्ट्स की भी कड़ी जांच के आदेश दिए हैं।
जांच के दायरे में 6 से 7 बड़ी कंपनियां
सड़क मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे से जुड़ी ऐसी कई शिकायतें और घटनाएं सामने आई हैं। इन सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है और 6 से 7 बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां जांच के दायरे में हैं। जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद इन कंपनियों पर भी कड़े प्रतिबंध और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।