फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जुलाई-अगस्त की सुस्ती के बाद सीमेंट महंगा: सितंबर में सात रुपये बढ़े दाम; आगे कितनी बढेगी कीमत?

Wed, 30 Sep 2026 06:57 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली।

सार

सितंबर में सीमेंट की कीमतों ने फिर रफ्तार पकड़ी और देशभर में औसत भाव 7 रुपये बढ़कर 356 रुपये प्रति बोरी हो गया। ईंधन महंगा होने और निर्माण गतिविधियों में सुधार के बीच कंपनियां अक्तूबर में भी 5 से 20 रुपये तक दाम बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों की जेब पर कितना पड़ेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
विज्ञापन
सीमेंट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

निर्माण क्षेत्र और घर खरीदारों के लिए एक जरूरी खबर है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सुस्त रहने के बाद सितंबर में सीमेंट की कीमतों में तेजी लौटी है। सेंट्रम ब्रोकिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में देशभर में सीमेंट की औसत खुदरा कीमत में 7 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह बढ़कर 356 रुपये प्रति बोरी पर पहुंच गई है।
विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में ट्रेड और नॉन-ट्रेड दोनों सेगमेंट में कीमतें बढ़ी हैं, हालांकि अधिकांश बाजारों में नॉन-ट्रेड कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिली है। क्षेत्रीय स्तर पर बात करें तो, दक्षिण भारत सबसे आगे रहा, यहां प्रति बोरी 11 रुपये की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई।

पश्चिम भारत में औसतन 9 रुपये प्रति बोरी का उछाल आया, मध्य, पूर्व और उत्तर भारत तीनों क्षेत्रों में सीमेंट की कीमतों में 5-5 रुपये प्रति बोरी की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, जुलाई और अगस्त की कमजोरी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अखिल भारतीय औसत ट्रेड मूल्य 351 रुपये प्रति बोरी पर रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले एक रुपये कम है। रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि सीमेंट कंपनियां अक्तूबर में एक बार फिर कीमतों में 5 से 20 रुपये प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी करने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, इन बढ़ी हुई कीमतों का टिक पाना पूरी तरह से मांग में सुधार और डीलरों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। हाल के हफ्तों में ईंधन की कीमतों में आए उछाल के बाद कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है, जिसे थामने के लिए दाम बढ़ाना मजबूरी है। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: म्यूचुअल फंड: ज्यादा पैसा मतलब बेहतर फंड नहीं! छोटे फंड ने बड़े फंड को रिटर्न में कैसे पछाड़ा?
विज्ञापन


ग्राहकों तक नहीं असर
खास बात यह है कि कंपनियों की ओर से बिलिंग रेट बढ़ाने के बावजूद कई बाजारों में यह बढ़ोतरी पूरी तरह ग्राहकों तक नहीं पहुंची है, क्योंकि डीलर अपने तिमाही लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पुराने दामों पर ही माल बेचते रहे। हालांकि, मानसून के असर के कारण जुलाई-अगस्त में मांग सीमित रही थी, लेकिन सितंबर के अंत तक कई बाजारों में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में सुधार देखा गया है, जिससे जल्द ही अब इस बढ़ोतरी का असर ग्राहकों की जेब पर भी दिखेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें