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एमएलएफएस सिस्टम: सेना के निजी वाहनों को टोल छूट देने से सड़क मंत्रालय का इनकार, जानिए किस बात का दिया सुझाव

Wed, 23 Sep 2026 05:52 PM IST
द बोनस शरद पाण्डेय, द बोनस, नई दिल्ली।

सार

सेना के निजी वाहनों को एमएलएफएफ सिस्टम में टोल छूट क्यों नहीं मिलेगी? जानिए सड़क मंत्रालय ने विशेष फास्टैग की मांग क्यों खारिज की और रीइम्बर्समेंट का क्या सुझाव दिया। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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विस्तार
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देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर सफर को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार मल्टी लेन फ्लो फ्री (एमएलएफएफ) सिस्टम तेजी से लागू कर रही है। इस आधुनिक व्यवस्था के तहत अब राजमार्ग पर न तो कोई टोल प्लाजा होगा और न ही कहीं पर टोल कर्मी तैनात मिलेंगे। वाहन बिना रुके फर्राटा भर सकेंगे और टोल राशि स्वतः कट जाएगी। लेकिन इस नई तकनीक के आने से सेना के निजी वाहनों पर टोल छूट को लेकर एक नया पेंच फंस गया है।

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मौजूदा समय में देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर कुल 1150 से अधिक टोल प्लाजा हैं। इनमें से छह स्थानों पर एमएलएफएफ की शुरुआत हो चुकी है और 104 टोल प्लाजा के लिए टेंडर निकाले जा चुके हैं, ताकि शत-प्रतिशत टोल वसूली सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में देश में 83,000 करोड़ रुपये से अधिक की टोल वसूली हो रही है, जिसमें 98 फीसदी से ज्यादा टोल संग्रह डिजिटल हो रहा है।

सेना के आधिकारिक वाहनों के नंबर अलग होते हैं, इसलिए उन्हें पहले भी टोल नहीं चुकाना पड़ता था और नई व्यवस्था के तहत भी उन्हें छूट जारी रहेगी। विवाद असल में सेना के उन कर्मियों के निजी वाहनों को लेकर है, जो अब तक टोल प्लाजा पर आईडी कार्ड दिखाकर शुल्क देने से बच जाते थे। लेकिन एमएलएफएफ सिस्टम में बैरियर और टोल कर्मी न होने के कारण टोल अपने आप कटेगा, जिससे बचने के लिए सेना ने विशेष फास्टैग या छूट की मांग की थी।
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सड़क परिवहन मंत्रालय का तर्क
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सेना की इस मांग को खारिज करते हुए साफ कह दिया है कि करीब आठ लाख सैन्य कर्मियों को इस तरह की छूट नहीं दी जा सकती। मंत्रालय का कहना है कि यह पहचान करना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव है कि सफर के दौरान कौन सा कर्मी आधिकारिक यात्रा पर है और कौन निजी यात्रा पर। इस बात की सही जानकारी केवल संबंधित कर्मी के कार्यालय के पास ही हो सकती है। इसलिए, मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि सेना के संबंधित कार्यालय अपने नियमों के तहत ऐसे कर्मियों को टोल खर्चे का रीइम्बर्समेंट कर सकते हैं।

सालाना पास का विकल्प
इस नई व्यवस्था को लेकर मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को भी पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एमएलएफएफ व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद वाहनों को स्वतः कटने वाले शुल्क से सीधे तौर पर छूट मिलना संभव नहीं होगा। ऐसे में राज्य चाहें तो टोल रोड से गुजरने वाले अपने वाहनों के लिए सालाना पास बनवा सकते हैं।

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