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फंड ट्रांसफर करते वक्त ध्यान रखेंगे 10 बातें तो नहीं होंगे परेशान

Tue, 05 Jun 2018 02:48 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में  फंड ट्रांसफर करना अब आम बात होती जा रही है, लेकिन इसके साथ रिस्क भी जुड़ गया है। यूपीआई, मोबाइल वॉलेट, आईएमपीएस, आरटीजीएस व एनईएफटी जैसे फंड ट्रांसफर में फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं। इससे लोगों को लाखों रुपये की चपत लग जाती है। आइए कुछ ऐसे टिप्स के बारे में जानते हैं, जिनकी मदद से ऑनलाइन मनी ट्रांसफर को सेफ बनाने के साथ आप फ्रॉड से भी बच सकते हैं।

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वेबसाइट पर सबसे पहले देखें https का साइन

हैकर्स भी स्मार्ट हो गए हैं। इन्होंने भी बैंक की वेबसाइट की हूबहू कॉपी करके इंटरनेट पर अपलोड कर रखी है। ऐसी फेक साइट पर लॉगइन करने से हैकर्स के पास आपका यूजरनेम और पासवर्ड आसानी से पहुंच जाता है। जिसके बाद वो आपके अकाउंट से पैसों को आसानी से निकाल लेते हैं। ऐसी फेक साइट से बचने के लिए हमेशा वेबसाइट के यूआरएल  में बैंक के नाम से पहले https लिखा हुआ अवश्य देखें। अगर यूआरएल में https नहीं लिखा है और इसके बजाए केवल http लिखा है तो भूलकर भी नेट बैंकिंग के लिए लॉगिन व फंड ट्रांसफर नहीं करें।

पब्लिक वाई-फाई का ना करें इस्तेमाल

बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने के लिए  पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से हमेशा बचें। पब्लिक वाई-फाई पासवर्ड से प्रोटेक्टेड नहीं होता है जिसको हैकर्स को अटैक करने में कोई दिक्कत नहीं आती है। अगर आप घर में भी वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं तो उसको हमेशा पासवर्ड से प्रोटेक्ट करें। घर में इस्तेमाल हो रहे वाई-फाई में 14 कैरेक्टर का पासवर्ड डाल सकते हैं।

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ऑटो बिल पेमेंट करने के लिए तय करें लिमिट

आपको पता होता है कि हर महीने आप कितने बिलों का पेमेंट क्रेडिट या डेबिट कार्ड से करते हैं। कई लोग बैंक को स्टैंडिंग इंस्ट्रकशन देते हैं जिससे अकाउंट से बिल का पेमेंट हर महीने अपने आप हो जाता है। आप अपने बैंक को इसकी लिमिट तय करने के लिए कह सकते हैं। इससे फ्रॉड होने की दशा में कम से कम नुकसान होता है।
 
डेस्कटॉप, लैपटॉप में अपलोड करें स्ट्रॉन्ग एंटी वायरस

आप अपने लैपटॉप या डेस्कटॉप में एंटी वायरस डालें जिससे हैकर्स आपके सिस्टम को हैक नहीं कर पाएं। हैकर्स हमेशा ऐसा सिस्टम ढूंढते हैं जिनमें किसी प्रकार का कोई एंटी वायरस नहीं पड़ा होता है। अगर आपके सिस्टम में एंटी वायरस नहीं पड़ा है तो आप इसमें नामी कंपनी का एंटी वायरस सॉफ्टवेयर अपलोड करें, ताकि आप फिशिंग से बचे रहें।
 
बनाएं मजबूत पासवर्ड

जब आप आप इंटरनेट का प्रयोग नेट बैंकिंग के लिए करें तो अपने अकाउंट को लॉग-इन करने के लिए हमेशा स्ट्रॉन्ग पासवर्ड बनाएं। पासवर्ड बनाने के लिए कभी भी अपनी पर्सनल डिटेल्स का इस्तेमाल करने से बचें। पासवर्ड में स्पेशल करेक्टर और नंबर का प्रयोग करें और कभी भी आठ कैरेक्टर से कम का पासवर्ड ना बनाएं। इसके साथ-साथ पासवर्ड में अपरकेस और लोअर केस में करेक्टर का प्रयोग जरूर करें। पासवर्ड को हर एक महीने में बदलते रहें।
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ओटीपी का करें इस्तेमाल

जब भी आप कोई फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन करें तो हमेशा ओटीपी कोड का प्रयोग करें। ओटीपी कोड आपके मोबाइल पर तब आता है जब भी आप किसी को पेमेंट करते हैं। बैंक द्वारा इसको भेजा जाता है और यह केवल 15 मिनट के लिए वैलिड होता है। इसके साथ ही आप अपने नेटबैंकिंग अकाउंट में लॉगइन करने के लिए हमेशा रेग्युलर कीबोर्ड के बजाए वर्चुअल कीबोर्ड का इस्तेमाल करें।
 
मोबाइल ऐप से ट्रांसफर करते वक्त भी रखें सावधानी

आजकल लोग ऐप से मनी ट्रांसफर करते हैं। ऐप से मनी ट्रांसफर होने में भी फ्रॉड हो सकता है। क्योंकि हैकर्स ने फर्जी ऐप भी गूगल प्ले स्टोर पर इन्स्टॉल कर रखे हैं। अपने बैंक का ऐप प्ले स्टोर से डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग को पहले चेक करें। अगर रेटिंग ज्यादा अच्छी ना हो और आपके हिसाब से बहुत कम लोगों ने ऐप को डाउनलोड कर रखा हो तो उस ऐप को कतई डाउनलोड ना करें। गलती से ऐसे ऐप के डाउनलोड हो जाने के बाद इसको अपने फोन से तुरंत अनइन्स्टॉल कर दें। 
 
डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी को ना करें स्टोर

ऐप में या फिर ऑनलाइन अपने ई-मेल अकाउंट में डेबिट और क्रेडिट का नंबर, ईयर एवं सीवीवी नंबर को कभी भी सेव करके ना रखें। ई-मेल अकाउंट हैक होने की स्थिति में आपके अकाउंट से पैसे निकल सकते हैं। अगर आपको भूलने की बीमारी है और कार्ड का नंबर याद नहीं रहता है तो उसको किसी कॉपी या फिर डायरी में लिखकर रखें।
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