शेयर बाजार में बीते हफ्ते में मजबूती का माहौल दिखा है। इस दौरान निफ्टी इंडेक्स में 482.60 प्वाइंट की तेजी देखने को मिली है। चार जुलाई (सोमवार) को निफ्टी 15741.80 अंक पर खुले थे और 8 जुलाई (शुक्रवार) को बाजार 16220.60 अंक पर बंद हुए हैं। इस तरह निफ्टी के शेयरों में तकरीबन तीन प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है।
इसी तरह, बीएसई के सेंसेक्स इंडेक्स में भी तीन प्रतिशत की मजबूती दिखी है। सेंसेक्स चार जुलाई को 52924.10 के लेवल पर खुला था वहीं, आठ जुलाई को यह 54481.84 प्वाइंट पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की कुछ अहम घटनाओं के कारण भारतीय बाजारों में यह महत्वपूर्ण तेजी देखने को मिली है। क्रूड ऑयल की कीमतों में कमजोरी और भारतीय बाजार के प्रति एफआईआई के बदलते रुख के कारण स्टॉक मार्केट को सहारा मिला है।
निफ्टी 50 के स्टॉक्स में लग्जरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी टाइटन के शेयरों में इस हफ्ते 10.2 प्रतिशत तक की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है।
2022-23 की पहली तिमाही के दौरान टाटा समूह ने अपनी बिक्री के जो आंकड़े जारी किए थे उनमें टाटा समूह की कंपनी टाइटन के प्रीमियम और लक्जरी सामानों की अपेक्षाकृत मजबूती देखी गई थी। टाइटन के उत्पादों की मांग में आई वृद्धि की यह खबर के कारण कंपनी इस हफ्ते का टॉप गेनर स्टॉक बनने में सफल रहा है।
बीते हफ्ते निफ्टी के हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टूब्रो के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली है। वहीं, बीएसई के कैपिटल गुड्स इंडेक्स में भी 6 प्रतिशत की अच्छी तेजी देखने को मिली है। बीएसई के दूसरे इंडक्स एफएमसीजी, पावर और ऑटो ने भी तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है।
बीएसई के एसएंडपी बीएसई कैपिटल गुड्स के शेयर वी गार्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड में बीते हफ्ते चार प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं एलएंडटी के शेयरों में 7.54 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि कॉमोडिटीज की कीमतों में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों का भारतीय बाजार के प्रति रुख बदलने से बाजार में मजबूती लौटी है। एफएफआई बीते हफ्ते में बाजार में तुलनात्मक रूप से कम बिकवाली करते दिखे हैं। इससे बाजार का सेंटीमेंट भी सुधरा है। क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट ने कई सेक्टर के शेयरों को टॉप गेनर बनने में मदद की है।
वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बीते हफ्ते 108.43 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 104.24 डॉलर प्रति बैरल रह गई हैं। इस बीच, अमेरिका की जो बाइडेन प्रशासन ने अपने भंडार से यूरोप और एशिया में तेल भेजने का फैसला किया है, इससे बाजार में भ्रम की स्थिति बनी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत में मुद्रास्फीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद बढ़ी है।
वहीं, अगर बात भारतीय रुपये की करें तो बीते हफ्ते में भी यह कमजोर होकर नया लो छूता हुआ नजर आया है। आठ जुलाई को एक डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे टूटकर 79.25 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पिछले हफ्ते एक जुलाई को रुपया 79.04 के स्तर पर बंद हुआ था।
जानकार मानते हैं कि भारतीय बाजार में मुद्रास्फीति की स्थिति, कैश फ्लो, विदेशी पूंजी निवेश की मात्रा और कंपनियों की डिविडेंट पॉलिसी का असर आने वाले समय में भी शेयरों की कीमत पर पड़ेगा। वहीं, उपभोक्ता उत्पादों और शीर्ष आईटी कंपनियों की बीती तिमाही के नतीजे भी यह तय करेंगे कि आने वाले सप्ताह में बाजार का मूड कैसा रहेगा?