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Vistara Merger: 17 साल में पांच भारतीय फुल सर्विस एयरलाइन बाजार से गायब, अब केवल एयर इंडिया 'आसमान' में

Mon, 11 Nov 2024 01:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vistara Merger: देश में एक और फुल सर्विस एयरलाइन की विदाई हो गई है। देश में कभी पांच फुल सर्विस एयरलाइन थे, अब इनकी संख्या महज एक रह जाएगी। विस्तारा के एयर इंडिया में विलय के बाद मंगलवार से इसका स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और यह एयर इंडिया के ब्रांड नेम के तहत उड़ान भरने लगेगी। विलय के बाद एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। देश के विमानन कारोबार में यह एक बड़ा बदलाव साबित होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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एयर इंडिया - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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विस्तारा का एयर इंडिया समूह में विलय की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो जाएगी। मंगलवार से विस्तारा के विमान एयर इंडिया के नाम पर उड़ान भरेंगे। इस बदलाव के साथ ही भारतीय विमानन क्षेत्र में पूर्ण सेवा प्रदाता एयरलाइन (फुल सर्विस एयरलाइप) की संख्या सिर्फ एक रह जाएगी। आज से करीब 17 साल पहले देश में फुल सर्विस एयरलाइन की संख्या पांच थी। अब यह संख्या घटकर महज एक रह गई है।

सिंगापुर एयरलाइन की अब एयर इंडिया में 25.1 फीसदी हिस्सेदारी

एयर इंडिया में विलय के बाद विस्तारा में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले सिंगापुर एयरलाइंस के पास अब देश में एकमात्र बची फुल सर्विस एयरलाइन एयर इंडिया में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। सिंगापुर एयरलाइंस (एसआईए) विस्तारा के विलय के बाद एयर इंडिया में 3,194.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश कर रही है। अंततरराष्ट्रीय विमानन कंपनी ने पिछले शुक्रवार को अपने वित्तीय परिणाम जारी करते हुए कहा कि वह एयर इंडिया की आवश्यकताओं के आधार पर अधिक पूंजी निवेश के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय वाहक ने शुरू में 2,058.5 करोड़ रुपये  (360 मिलियन सिंगापुर डॉलर या 250 मिलियन अमेरिकी) का निवेश करने पर सहमति व्यक्त की थी। यह आश्वासन उसने 2022 में विस्तारा के एयर इंडिया के साथ पर सहमति देने दौरान दिया था। इस डील के जरिए विस्तारित एयर इंडिया समूह में सिंगापुर एयरलाइन को 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी मिल गई थी। अब सिंगापुर एयरलाइंस (एसआईए) नवंबर में विस्तारा के विलय के बाद एयर इंडिया में 3,194.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश कर रही है।

घरेलू एयरलाइन में एफडीआई को मंजूरी के बाद हुआ था विस्तारा का उदय

2012 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने विदेशी एयरलाइनों को घरेलू एयरलाइनों में 49 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी थी। उसके बाद पहली बार अब बंद हो चुकी जेट एयरवेज को खाड़ी एयरलाइंस एतिहाद से 24 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल हुई। उसी दौरान टाटा समूह की अगुवाई में एयरएशिया इंडिया और विस्तारा का उदय हुआ। विस्तारा पिछले 10 वर्षों में परिचालन शुरू करने वाली एकमात्र पूर्ण-सेवा वाहक भी है।

2007 में देश में कुल पांच फुल सर्विस एयरलाइन थे

2007 में पूर्ण-सेवा वाहक (एफएससी) इंडियन एयरलाइंस के एयर इंडिया के साथ विलय के बाद , कम से कम पांच एफएससी यानी फूल सर्विस एयरलाइन भारतीय आकाश में उड़ान भर रहे थे। अब विस्तारा के एयर इंडिया में मर्जर के साथ ही देश में फुल सर्विस एयरलाइन की संख्या महज एक (एयर इंडिया) रह गई है। विदेशी स्वामित्व वाली भारतीय विमानन कंपनियों की बात करें तो सबसे पहले इस मामले में जेट एयरवेज ने बाजी मारी थी, जिसमें अबू धाबी की एतिहाद एयरवेज ने 24 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद एयरएशिया इंडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी मलेशिया की एयरएशिया के पास है और शेष टाटा के पास है। इसके बाद विस्तारा का नंबर है- जिसमें सिंगापुर एयरलाइंस की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और 51 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा समूह के पास है।

पहले किंगफिशर, एयर सहारा और जेट एयरवेज बाजार से हुए गायब

जैसे-जैसे साल बीतता गया, किंगफिशर और एयर सहारा एयरलाइन बाजार से गायब हो गए। विस्तारा ने पहली बार जनवरी 2015 में उड़ान भरी। किंगफिशर 2012 में बंद हो गया, जबकि एयर सहारा, जिसे जेट एयरवेज ने अधिग्रहित कर लिया और जिसका नाम बदलकर जेटलाइट कर दिया गया था, 2019 में जेट एयरवेज के साथ डूब गया। फुल सर्विस एयरलाइन जेट एयरवेज को 25 वर्षों तक उड़ान भरने के बाद वित्तीय संकट के कारण अप्रैल 2019 में ग्राउंडेट कर दिया गया था, अब उसे पूरी तरह से बंद करने की तैयारी चल रही है। इस तरह, 12 नवंबर से विस्तारा के विलय के बाद एयर इंडिया देश की एकमात्र फुल सर्विस एयरलाइन रह जाएगी।

क्या है फुल सर्विस एयरलाइन और बजट एयरलाइन में अंतर?

बढ़ते हवाई यातायात और बदलते यात्रा पैटर्न के साथ, कई सस्ती एयरलाइनें दुनिया भर में आसमान पर हावी हो रही हैं और इनमें भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो भी शामिल है। एक वरिष्ठ एयरलाइन अधिकारी के अनुसार, पूर्ण सेवा और कम लागत वाली एयरलाइन के बीच अंतर करने वाली रेखा कुछ धुंधली है। उदाहरण के लिए, कुछ बजट एयरलाइन्स बिजनेस क्लास सीटें भी उपलब्ध कराती हैं। अन्य बातों के अलावा, एफएससी यात्रा के दौरान यात्रियों को अधिक आराम प्रदान करने का प्रयास करते हैं और भोजन सहित अन्य सेवाएं टिकट की कीमत में शामिल होती हैं।

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इसके अलावा, फुल सर्विस एयरलाइन ज्यादातर अलग-अलग प्रकार के विमानों का संचालन करते हैं और मोटे तौर पर, ये एयरलाइंस समग्र नेटवर्क लाभप्रदता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरी ओर, कम लागत वाली एयरलाइन्स मार्ग विशेष से होने वाले लाभ, टिकट के अलावा होने वाले अन्य सहायक राजस्व पर फोकस करते हैं। ये अधिकतर एक ही प्रकार के विमानों का संचालन करते हैं, ताकि खरच पर उनकी पकड़ बनी रहे।

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