फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tata Sons Board Meeting: टाटा संस की बोर्ड मीटिंग खत्म, जानिए इस बारे में क्या है अपडेट

Tue, 26 May 2026 06:05 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाटा संस की बोर्ड बैठक में नए व्यवसायों के बढ़ते घाटे और संभावित आईपीओ को लेकर चर्चा हुई। नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन से जुड़ी पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है, जानने के लिए अभी पढ़ें।
विज्ञापन
टाटा संस की बोर्ड बैठक - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाले देश के सबसे बड़े समूह टाटा की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की अहम बोर्ड बैठक मंगलवार को मुंबई स्थित मुख्यालय बॉम्बे हाउस में संपन्न हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें काफी तेज हो गई हैं। बोर्ड की इस बैठक का मुख्य फोकस समूह के नए व्यवसायों में बढ़ता घाटा और कंपनी के संभावित आईपीओ को लेकर उपजा तनाव रहा है।

हाल के दिनों में शीर्ष स्तर पर दिखा है टकराव

टाटा संस की इस महत्वपूर्ण बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा सहित कई स्वतंत्र निदेशकों, जैसे हरीश मनवानी और अनीता एम. जॉर्ज ने हिस्सा लिया। बैठक खत्म होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मीडिया से कोई बात नहीं की। हाल के दिनों में समूह के भीतर शीर्ष स्तर पर काफी टकराव देखा गया है, जिसमें कुछ सदस्यों को हटाने की कोशिशें और चंद्रशेखरन के अध्यक्ष पद पर बने रहने के फैसले को टालना शामिल है। 

विज्ञापन


माना जा रहा है कि इस बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, समूह की कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच सप्ताहांत में मुलाकात हुई थी।

चिंता का बड़ा कारण, नए व्यवसायों का बढ़ता घाटा 

टाटा संस में दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा की सबसे बड़ी चिंता समूह की नई और अनलिस्टेड (गैर-सूचीबद्ध) कंपनियों का बढ़ता घाटा है। 

  • घाटे के आंकड़े: वित्त वर्ष 2025 (FY25) में टाटा समूह के गैर-सूचीबद्ध व्यवसायों का घाटा 10,905 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
  • अनुमान: रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में यह घाटा बढ़कर 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है।
  • प्रभावित सेक्टर: यह भारी नुकसान मुख्य रूप से चंद्रशेखरन के नेतृत्व में शुरू किए गए नए व्यवसायों, जैसे टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स वेंचर्स और हाल ही में सरकार से खरीदी गई विमानन कंपनी एयर इंडिया से हो रहा है।

आईपीओ और उत्तराधिकार पर मतभेद

वित्तीय प्रदर्शन के अलावा, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का मुद्दा भी विवाद का एक बड़ा कारण है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी मानते हुए शीर्ष 15 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की सूची में रखा है, जिसके लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य है। इसके बावजूद, नोएल टाटा कंपनी का आईपीओ लाने के पक्ष में नहीं हैं और इसके प्रति अनिच्छुक हैं। इन सब के बीच उत्तराधिकार की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं; नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को समूह से जुड़े कुछ ट्रस्टों और फाउंडेशनों में शामिल कर लिया गया है।

आगे का आउटलुक

टाटा समूह इस वक्त एक अहम चौराहे पर खड़ा है। नए अनलिस्टेड कारोबारों को मुनाफे में लाना और आरबीआई के लिस्टिंग नियमों के साथ रणनीतिक तालमेल बिठाना, टाटा संस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच के इन वैचारिक मतभेदों का समाधान ही भविष्य में समूह की दिशा और स्थिरता तय करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें