नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाले देश के सबसे बड़े समूह टाटा की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की अहम बोर्ड बैठक मंगलवार को मुंबई स्थित मुख्यालय बॉम्बे हाउस में संपन्न हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें काफी तेज हो गई हैं। बोर्ड की इस बैठक का मुख्य फोकस समूह के नए व्यवसायों में बढ़ता घाटा और कंपनी के संभावित आईपीओ को लेकर उपजा तनाव रहा है।
टाटा संस की इस महत्वपूर्ण बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा सहित कई स्वतंत्र निदेशकों, जैसे हरीश मनवानी और अनीता एम. जॉर्ज ने हिस्सा लिया। बैठक खत्म होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मीडिया से कोई बात नहीं की। हाल के दिनों में समूह के भीतर शीर्ष स्तर पर काफी टकराव देखा गया है, जिसमें कुछ सदस्यों को हटाने की कोशिशें और चंद्रशेखरन के अध्यक्ष पद पर बने रहने के फैसले को टालना शामिल है।
टाटा संस में दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा की सबसे बड़ी चिंता समूह की नई और अनलिस्टेड (गैर-सूचीबद्ध) कंपनियों का बढ़ता घाटा है।
वित्तीय प्रदर्शन के अलावा, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का मुद्दा भी विवाद का एक बड़ा कारण है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी मानते हुए शीर्ष 15 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की सूची में रखा है, जिसके लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य है। इसके बावजूद, नोएल टाटा कंपनी का आईपीओ लाने के पक्ष में नहीं हैं और इसके प्रति अनिच्छुक हैं। इन सब के बीच उत्तराधिकार की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं; नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को समूह से जुड़े कुछ ट्रस्टों और फाउंडेशनों में शामिल कर लिया गया है।
टाटा समूह इस वक्त एक अहम चौराहे पर खड़ा है। नए अनलिस्टेड कारोबारों को मुनाफे में लाना और आरबीआई के लिस्टिंग नियमों के साथ रणनीतिक तालमेल बिठाना, टाटा संस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच के इन वैचारिक मतभेदों का समाधान ही भविष्य में समूह की दिशा और स्थिरता तय करेगा।