प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के एक दिन बाद ही भारतीय शेयर बाजार ने पूंजीकरण के मामले में एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। मंगलवार को दिन के कारोबार में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों की बाजार पूंजी पहली बार पांच लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गई। हालांकि, बाजार बंद होते समय यह 4.97 लाख करोड़ डॉलर रह गई।
पांच लाख करोड़ डॉलर के इस क्लब में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग पहले से शामिल हैं। इस आधार पर भारतीय बाजार दुनिया में पांचवें स्थान पर है। रुपये में भी देखें तो बाजार पूंजीकरण रिकॉर्ड 414.65 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया। पीएम मोदी ने सोमवार को कहा था, चार जून को आने वाले चुनावी नतीजों के बाद शेयर बाजार सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। उनके बयान के बाद मंगलवार को सरकारी कंपनियों के शेयर 15 फीसदी तक उछल गए। इससे सूचीबद्ध कंपनियों की बाजार पूंजी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, अंत में सेंसेक्स 52.63 अंक टूटकर 73,953.31 पर बंद हुआ।
महज 6 माह में एक लाख करोड़ डॉलर बढ़ी पूंजी
बाजार में लगातार तेजी से महज छह महीने में ही पूंजी एक लाख करोड़ डॉलर बढ़ गई। यह तब हुआ है, जब विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। इन निवेशकों ने इस साल अब तक घरेलू बाजार से शुद्ध रूप से 26,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अकेले मई में ही शुद्ध रूप से 28,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। मार्च में इन्होंने 35,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर खरीदे थे।
इन सरकारी कंपनियों में सर्वाधिक तेजी
- सरकारी कंपनियों में आरवीएनएल के शेयर में सबसे ज्यादा 15 फीसदी तेजी रही। इसके साथ ही कंपनी का शेयर बढ़कर 345 रुपये के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। आखिर में यह 341.70 पर बंद हुआ।
- कोचिन शिपयार्ड एक साल के ऊपरी स्तर 1,696 रुपये पर पहुंच गया। अंत में यह 1,636.70 पर बंद हुआ।
- एसजेवीएन 11 फीसदी उछलकर 151 रुपये तक चला गया।
- इरकॉन का शेयर दिन में 8 फीसदी तक उछलकर एक साल के ऊपरी स्तर 301 रुपये पर पहुंच गया।
- भारत डायनॉमिक्स 8 फीसदी बढ़कर 2,689 रुपये पर चला गया। इसका भी यह एक साल का रिकॉर्ड है।
- ऑयल इंडिया में 5 फीसदी तेजी। शेयर एक साल के शीर्ष पर।
अब नए सिरे से होगी पूंजीकरण की गणना
सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण की गणना के तरीके को बदल दिया है। एक दिन (वर्तमान में 31 मार्च) के बाजार पूंजीकरण का उपयोग करने के बजाय कंपनियां अब छह माह के लिए औसत बाजार पूंजीकरण का उपयोग करेंगी। यह बदलाव 31 दिसंबर, 2024 से लागू होगा। अनुपालन की रैंकिंग एक जुलाई से 31 दिसंबर तक औसत बाजार पूंजीकरण पर आधारित होगी। इसमें 31 दिसंबर कटऑफ तारीख होगी।