बजाज फाइनेंस और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के कारण शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
टाटा स्टील, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड और मारुति भी पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल रहे। हालांकि, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक और भारतीय स्टेट बैंक को लाभ हुआ। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 2,133.69 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालाँकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,617.14 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा, "निकट भविष्य में बाजार की स्थिति कमजोर हो गई है। पिछले चार कारोबारी दिनों में एफआईआई द्वारा 11,572 करोड़ रुपये की निरंतर बिकवाली से बाजार पर दबाव रहेगा।" एशियाई बाजारों में, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कम्पोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सकारात्मक क्षेत्र में कारोबार कर रहा था।
गुरुवार को अमेरिकी बाजार मिश्रित रुख के साथ बंद हुए। भारत और ब्रिटेन ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अगले वर्ष से 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात ब्रिटेन में शुल्क मुक्त पहुंचेंगे, जबकि कारों और व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क कम हो जाएगा। यह समझौता, जो उच्च टैरिफ पर अमेरिकी रोक की समाप्ति से कुछ दिन पहले हुआ है, का लक्ष्य 2030 तक दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार को दोगुना करना है।
विजयकुमार ने आगे कहा, "भारत-यूके एफटीए, जो किसी प्रमुख विकसित देश के साथ भारत का पहला व्यापक व्यापार समझौता है, के बाज़ार के नज़रिए से दो निहितार्थ हैं। पहला, यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को काफी बढ़ावा देगा, जिसे बाज़ार सकारात्मक रूप में देखेगा। दूसरा, यह एफटीए, भारत द्वारा अन्य देशों के साथ हस्ताक्षरित कई अन्य एफटीए के साथ, भारत को मुक्त व्यापार के लिए प्रतिबद्ध राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है। यह तथ्य कि यह एफटीए टैरिफ युद्धों के दौर में आया है, सराहनीय है, और उम्मीद है कि इससे अमेरिका के साथ निष्पक्ष व्यापार समझौता करने की भारत की संभावनाएँ बेहतर होंगी।"
उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों के बाद रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के शेयरों में शुक्रवार को लोअर सर्किट लगा, जिसके कारण दोनों कंपनियों के शेयर इंट्रा-डे में 5-5 प्रतिशत तक फिसल गए।
ईडी की कार्रवाई शुरू होने के बाद दोनों कंपनियों में लगातार निवेशक बिकवाली कर रहे हैं और बीते दो कारोबारी सत्रों में शेयर 10 प्रतिशत से अधिक फिसल चुके हैं। ईडी की ओर से अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के 35 से अधिक ठिकानों पर 3,000 करोड़ रुपए के यस बैंक लोन घोटाले मामले में छापे मारे गए थे।