बीते 12 वर्षों में निफ्टी भी 400 फीसदी से ज्यादा उछला
एक दशक पहले जो निफ्टी 6000 का स्तर भी हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा था, बुधवार को निफ्टी 26000 का स्तर पार कर गया। इसमें 12 वर्षों के दौरान करीब 400 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। निफ्टी के 50 शेयरों का मार्केट कैप 472 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। बीते कुछ महीनों में मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं और जियोपॉलिटिकल तनावों के कारण बाजार में आए उठा-पटक के बावजूद भारतीय बाजार में अब एक बार फिर हरियाली लौटी है। जानकारों का मानना है कि वर्ष 2030 तक निफ्टी ऊंचाईयों को हासिल करते हुए 50,000 का आंकड़ा छू सकता है।
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जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और रूस-यूक्रेन के बीच संभावित शांति समझौते से वैश्विक स्तर पर इक्विटी बाजार में सकारात्मक भावना बनी है। इसका फायदा भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों को मिला है। इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.57 प्रतिशत गिरकर 62.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
वैश्विक एजेंसियों की भारतीय बाजार पर क्या राय?
भारतीय बाजार में हरियाली लौटने के प्रति वैश्विक एजेंसी भी आश्वस्त हैं। इस बीच, जेपी मॉर्गन ने 2026 के अंत तक निफ्टी 50 का लक्ष्य बढ़ाकर 30,000 कर दिया है और एमएससीआई इंडिया की आय में 2026 में 13 प्रतिशत और 2027 में 14 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है। बैंक ने कहा, "सहायक राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों, घरेलू मांग में सुधार और व्यापक क्षेत्रीय वृद्धि के साथ, कॉर्पोरेट आय में उछाल आना तय है।" साथ ही, बैंक ने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में सुधार से निकट भविष्य में पुनर्मूल्यांकन हो सकता है। मैक्वेरी ने भी तेजी की बात दोहराते हुए कहा कि "जोखिम का संतुलन अनुकूल हो गया है और निफ्टी के 2026 के अंत में 20,000 के बजाय 30,000 के स्तर के करीब पहुँचने की संभावना है।