भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को चौतरफा बिकवाली देखी गई प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में 1.5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक लुढ़ककर 71,700 के स्तर से नीचे आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 300 से अधिक अंक गंवाकर 22,300 के स्तर के नीचे पहुंच गया। इस तेज बिकवाली के कारण बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर 462 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया, जिससे महज एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये हवा हो गए।
बाजार में मंदी का रुख इस कदर हावी रहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 2,645 शेयरों में गिरावट आई, जबकि केवल 693 शेयर ही बढ़त दर्ज कर सके और 117 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। सेंसेक्स पर आईटीसी (आईटीसी), अदाणी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के शेयरों में 4% तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, टाइटन और आईटी क्षेत्र के दिग्गज शेयरों- जैसे टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टीसीएस और इंफोसिस ने 2% तक की तेजी दर्ज कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
बाजार से जुड़े विश्लेषकों के अनुसार, इस भारी बिकवाली के पीछे निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हैं:
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, आरबीआई के सख्त रुख और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण वैल्युएशन पर दबाव बना रहेगा। जब तक अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.3% से ऊपर बनी रहेगी, तब तक विदेशी निवेशक हर तेजी पर बिकवाली जारी रख सकते हैं। निवेशकों के लिए रणनीति: बाजार में टिकाऊ सुधार तभी संभव होगा जब विदेशी निवेशक दोबारा खरीदार बनेंगे। विश्लेषकों का सुझाव है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में निवेशकों को घबराने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण से वैल्यू स्टॉक्स में बने रहना चाहिए और बढ़ते ब्याज दर के माहौल में फिक्स्ड इनकम के अवसरों पर भी विचार करना चाहिए।
रुपया गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे बढ़कर 96.65 पर पहुंच गया। यह भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप के कारण हुआ। हालांकि, रुपया लगातार व्यापक आर्थिक चुनौतियों के कारण दबाव में है। इनमें वैश्विक डॉलर की मजबूती और ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें शामिल हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में भी तीन हफ्तों में 50 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट आई है। फाइनरेक्स के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, डॉलर की मजबूत कॉर्पोरेट आयातक मांग और सुरक्षित-निवेश पूंजी के बदलाव ने आरबीआई की नीति को कमजोर किया। गवर्नर ने रुपये को उसके सही मूल्य पर लाने में मदद करने का आश्वासन दिया है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 इंडेक्स, शंघाई का एस.एस.ई. कंपोजिट इंडेक्स और हैंग सेंग इंडेक्स सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार भी निचले स्तर पर बंद हुए थे। एच.एस.टी. वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि अब केवल आरबीआई की दर वृद्धि ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सख्त घरेलू और वैश्विक मौद्रिक स्थितियों की संभावना भी एक बड़ी चिंता है। फेडरल रिजर्व के मिनट्स भी अमेरिकी दर वृद्धि की ओर इशारा करते हैं।