पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट का सिलसिला जारी रहा। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर पड़ने से बाजार दबाव में कारोबार करता नजर आया। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स 2300 से ज्यादा अंक तक गिरा।कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1898.16 अंक गिरकर 77,020.74 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 593.95 अंक या 23,856.50 अंक पर आ गया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बाजार में आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट मार्गों में से एक है।
कच्चे तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं और लगभग तीन साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं।
ब्रेंट क्रूड 20% से ज्यादा उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।
पिछले सप्ताह ही इसमें लगभग 28% की तेज रैली दर्ज की गई थी।
कीमतें 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
एशियाई कारोबार के दौरान सोमवार को कीमती धातुओं में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
स्पॉट गोल्ड 2.12% गिरकर 5,049 डॉलर प्रति औंस
स्पॉट सिल्वर 3.51% गिरकर 81.34 डॉलर प्रति औंस
कुल मिलाकर भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों द्वारा पोजिशन एडजस्ट करने के कारण सोना और चांदी में लगभग 3.5% तक गिरावट दर्ज की गई।
तेल की कीमतों में तेज उछाल और बढ़ते वैश्विक जोखिम के कारण एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6.22% गिरा और 6 फरवरी के बाद पहली बार 53,000 के नीचे आ गया
टॉपिक्स इंडेक्स 5.27% लुढ़क गया
दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6.68% गिर गया
तेज अस्थिरता के चलते दक्षिण कोरिया में कोस्पी 200 फ्यूचर्स की ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। पिछले सप्ताह भी वहां बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जब बेंचमार्क इंडेक्स 12% से ज्यादा टूट गया था और सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा था।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में हालिया उछाल को अस्थायी बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिर सकती हैं, और वैश्विक सुरक्षा के लिए यह छोटी कीमत है।
विश्लेषकों के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:
पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति
कच्चे तेल की कीमतों का रुख
वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान
अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आती है, तो इसका असर वैश्विक महंगाई, ब्याज दरों और शेयर बाजारों पर और गहरा पड़ सकता है।