प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश के लोगों से किफायत से चलने की अपील के बाद घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दिखी। सेंसेक्स करीब 900 अंकों तक टूट गया तो वहीं निफ्टी 23950 के नीचे आ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 845.68 अंक गिरकर 76,482.51 पर आ गया; निफ्टी 237.90 अंक गिरकर 23,936.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 145 पैसे गिरकर 94.96 पर आ गया।
वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी मुद्रा निकासी की चिंताओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर भारी दबाव डाला है।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए एक सार्वजनिक अपील की थी। उन्होंने देशवासियों से अनावश्यक विदेश यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने के साथ-साथ घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का आग्रह किया था। इसके अलावा, उन्होंने एक वर्ष के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का भी अनुरोध किया था। इस बयान के तुरंत बाद ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई:
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, प्रधानमंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा आपूर्ति और मूल्य चुनौतियों पर स्पष्ट रूप से बात की है। ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के इस परिदृश्य के बीच महंगाई का खतरा मंडरा रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) का घाटा 30,000 करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच गया है, जिससे इस सप्ताह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद काफी बढ़ गई है।
इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है। बग्गा के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के फिर से बढ़ने के जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और आगामी ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन से भी बाजार की उम्मीदें कम हुई हैं।
आनंद राठी के मुख्य अर्थशास्त्री सुजान हाजरा ने एक रिपोर्ट में बताया कि भारत की वृहद अर्थव्यवस्था (मैक्रो इकोनॉमी) मजबूत है, जिसमें पीएमआई (पीएमआई) गतिविधि और घरेलू मांग लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भू-राजनीतिक तनाव, लॉजिस्टिक बाधाओं और कच्चे तेल की उच्च कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को जीवित रखा है।