हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में शुरुआत से अंत तक नरमी छाई रही। सेंसेक्स 251.61 अंक गिरकर 77,017.79 पर बंद हुआ; निफ्टी 86.50 अंक गिरकर 24,032.80 पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे गिरकर 95.25 (अस्थायी) के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बिकवाली के दबाव में गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम कमजोर पड़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ताजा तनाव के कारण निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुईं। इसके चलते 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 251.61 अंक (0.33 प्रतिशत) टूटकर 77,017.79 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 86.50 अंक (0.36 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 24,032.80 पर बंद हुआ।
बाजार में इस गिरावट का एक प्रमुख कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भारतीय रुपये की कमजोरी रही। वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' 113 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की इन ऊंची कीमतों के दबाव के कारण मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे टूटकर 95.25 के अपने सर्वकालिक (रिकॉर्ड) निचले स्तर पर आ गया, जिससे निवेशकों में और अधिक सतर्कता देखी गई।
गिरावट के इस माहौल में सेंसेक्स की कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। दूसरी तरफ, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस के शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। इस बीच, सोमवार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बाजार में 2,835.62 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की थी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, "चुनाव के बाद का उत्साह अब कम हो गया है और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से बाजार वैश्विक कमजोरी के अनुरूप नीचे आया है"। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने बाजार को कुछ सहारा देने का काम किया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया, जापान और चीन के बाजार बंद रहे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ और यूरोपीय बाजार बढ़त पर कारोबार करते देखे गए।