शेयर बाजारों में गुरुवार को लगातार छठे दिन तेजी का सिलसिला जारी रही। इसमें आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का जोर रहा। बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि प्रस्तावित जीएसटी सुधारों और हाल ही में क्रेडिट रेटिंग में सुधार से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। निवेशकों का ध्यान जैक्सन होल संगोष्ठी में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की आगामी टिप्पणियों पर है।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 143.87 अंक या 0.17 प्रतिशत उछलकर 82000.71 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 373.33 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 82,231.17 पर पहुंच गया। सेंसेक्स के 14 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 16 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 33.20 अंक या 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,083.75 पर आ गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे गिरकर 87.25 (अनंतिम) पर बंद हुआ।
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सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख लाभ में रहीं। वहीं पावर ग्रिड, इटरनल, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अदानी पोर्ट्स पिछड़ने वालों में शामिल रहे।
यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक सकारात्मक दायरे में बंद हुए, जबकि जापान का निक्केई 225 सूचकांक और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में गिरावट देखी गई। बुधवार को अमेरिकी बाजार अधिकतर गिरावट के साथ बंद हुए।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 67.44 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.90 प्रतिशत बढ़कर 67.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,100.09 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,806.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार तक छह दिनों की तेजी में सेंसेक्स 1,765 अंक या 2.14 प्रतिशत और निफ्टी 596 अंक या 2.4 प्रतिशत चढ़ चुका है।
पंचिग एरर के कारण क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शेयरों में दिखा उतार-चढ़ाव
क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शेयरों की ब्लॉक बिक्री के दौरान गुरुवार को एक बड़ी गड़बड़ी दिखी। दरअसल उनके ब्रोकर एवेंडस स्पार्क इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ओर से प्रमोटरों की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचते समय पंचिंग एरर हुई जिसके कारण कंपनी के शेयरों में बड़ी बिकवाली दिखी। बाजार की भाषा में इसे फैट फिंगर एरर कहा जाता है। बाजार के सूत्रों के अनुसार प्रमोटर 24 प्रतिशत शेयर बेचला चाहते थे लेकिन ब्रोकर की गलती के कारण कहीं अधिक (सूत्रों के अनुसार 56%) शेयरों की बिक्री के ऑर्डर डल गए। इससे शेयरों में भारी बिकवाली दिखी।
हालांकि कंपनी के ब्रोकर एवेंडस स्पार्क ने कहा कि त्रुटि को विनिमय विनियमों के अनुरूप सुधार लिया गया है और कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। इससे व्यापार में भी कोई नुकसान नहीं हुआ। क्लीन साइंस ने एक्सचेंज फाइलिंग में पुष्टि की है कि वास्तविक बिक्री 24 प्रतिशत ही रहेगी और बैंकर की ओर से "तत्काल सुधारात्मक कदम" उठाए गए हैं। उपरोक्त गलती के कारण कंपनी के शेयर गुरुवार को एक समय पर 9% तक टूट गए थे और आखिरकार महज 2.76% की गिरावट के साथ 1148.5 रुपये के भाव पर बंद हुए।
बाद में स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला कि प्रमोटर समूह से जुड़े चार लोगों ने कुल 25.48 मिलियन यानी 23.98 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 1,080 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचकर 2,750 करोड़ रुपये जुटाए। खरीदारों में एसबीआई म्यूचुअल फंड (एमएफ), निप्पॉन इंडिया एमएफ, नॉर्वेज बैंक और बजाज आलियांज लाइफ शामिल थे।