सूचकांक ने वर्ष 2020 में हुए पूरे नुकसान की भरपाई कर ली है। यह एक जनवरी 2020 को 41,306.02 पर बंद हुआ था। इसके बाद जैसे ही कोरोना वायरस महामारी फैलती गई, वैश्विक बाजार धड़ाम हुआ, जिसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला। भारत में जब संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी, तब 24 मार्च 2020 को सेंसेक्स 25,640 के स्तर पर था। हालांकि इसके बाद बाजार में तेजी से रिकवरी हुई। लेकिन विश्लेषकों के अनुसार, आगे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
सबसे ज्यादा मुनाफे में रहीं टेक कंपनियां
जनवरी 2018 से अब तक सबसे ज्यादा मुनाफे में टेक कंपनियां रहीं। सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आईटी में 83 फीसदी और एनर्जी में 41 फीसदी की बढ़त आई। वहीं यूटिलिटी, टेलीकॉम और मेटल में क्रमश: 21 फीसदी, 25 फीसदी और 29 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बढ़ी रुचि
नवंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भी रुचि बढ़ी है। एफपीआई लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजारों में शुद्ध निवेशक बने रहे। एफपीआई ने नवंबर में भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से 62,951 करोड़ रुपये डाले हैं। इस दौरान एफपीआई ने शेयर बाजारों में रिकॉर्ड निवेश किया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार एफपीआई ने नवंबर में शेयरों में शुद्ध रूप से 60,358 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं ऋण या बॉन्ड बाजार में उनका शुद्ध निवेश 2,593 करोड़ रुपये रहा है।
उभरते बाजारों में निवेश को दी प्राथमिकता
ग्रो के सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हर्ष जैन ने कहा कि वैश्विक निवेशक विकसित बाजारों की तुलना में उभरते बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसकी वजह है कि उभरते बाजारों में उन्हें लाभ होने की अधिक संभावना है। जैन ने कहा, 'एफपीआई ने भारत में कुछ बड़ी कंपनियों में निवेश किया है। उनका ज्यादातर निवेश बैंकिंग क्षेत्र में आया है। ऐसे में उनका निवेश का प्रवाह कुछ शेयरों में केंद्रित है।'
- सेंसेक्स को 41,000 से 42,000 के स्तर तक पहुंचने में आठ महीने लगे।
- वहीं सूचकांक ने 44,000 से 45,000 का आंकड़ा सिर्फ 11 दिनों में पूरा कर लिया।
- 26 जून को 35,000 पर पहुंचले के बाद 113 कारोबारी सत्रों में यह 45,000 तक पहुंचा।
- साल 2018 से अब तक बीएसई का बाजार पूंजाकरण 19 लाख करोड़ रुपये बढ़ा और रिकॉर्ड 179 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
- इस दौरान विदेशी फंडों ने इक्विटीज में 1.9 लाख करोड़ रुपये डाले।