कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण भारतीय रुपया 2019 की पहली तिमाही में सर्वोच्च स्थान पर रहने की उम्मीद है। मंगलवार को रुपया पांच साल के सर्वाधिक उच्च शिखर पर बंद हुआ था। कच्चे तेल की नरमी से भारत के व्यापार घाटा को लेकर चिंता कम होने के बीच रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 112 पैसे के जोरदार उछाल के साथ 70.44 डॉलर पर बंद हुआ था।
2018 के मुकाबले देगा ज्यादा खुशी
बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपया 2018 के मुकाबले 2019 में कारोबारियों के साथ-साथ आम आदमी को ज्यादा खुशी देगा। 2018 में डॉलर की मजबूती के चलते रुपया एशिया में सबसे निचले स्तर पर चला गया था। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में मानक ब्रेंट कच्चा तेल 2.26 प्रतिशत गिरकर 14 माह के निम्न स्तर 58.26 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर चल रहा है।
रुपये में देखने को मिलेगी बड़ी रिकवरी
नोमुरा के अर्थशास्त्री दुष्यंत पदमनाभन ने कहा कि अगले साल भारतीय रुपये में अच्छी रिकवरी देखने को मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों के अलावा कंपनियों के पोर्टफोलियो में वृद्धि होने की संभावना है। तेल के सस्ता होने से भारतीय रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में कमी कर सकता है।
2019 में भाजपा बनाएगी फिर से सरकार
बाजार के एक्सपर्ट का मानना है कि 2019 में होने वाले आम चुनावों में भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर से केंद्र मे सरकार बनाएगी। हालांकि सीटों की संख्या में कमी आ सकती है। लेकिन अगर मई में भाजपा की सरकार नहीं बनती है तो फिर रुपये में और कमजोरी आने की संभावना है।
दिसंबर 2019 तक 68 पर पहुंचेगा रुपया
2019-20 में रुपया 71 से शुरू होकर के साल के अंत तक 68 के स्तर पर जा सकता है। लेकिन इसके लिए अन्य कारकों का स्थिर रहना जरूरी है। रुपये में मजबूती से महंगाई भी कम रहने की संभावना है।