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भारतीय मुद्रा: आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में चार फीसदी मजबूत हुआ रुपया

Mon, 29 Mar 2021 04:27 PM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली
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रुपया बनाम डॉलर - फोटो : pixabay
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चालू वित्त वर्ष में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया चार फीसदी से अधिक मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी पूंजी प्रवाह सतत रूप से जारी रहने तथा आरबीआई की सोच-विचार कर लाई गई नीतियों से आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के बावजूद भारतीय मुद्रा के लिए 2020-21 मजबूत वर्ष सुनिश्चित हुआ है। 

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2021-22 में 74 के स्तर तक रह सकता है रुपया 
रुपया 2021-22 में औसतन 73.50 से 74 के स्तर पर रह सकता है। इसका कारण टीका आने के बाद भी कोरोना वायरस को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं और इसका असर विदेशी विनिमय बाजार पर देखने को मिल सकता है।

रुपये के लिए उतार-चढ़ाव भरा साल
वित्त वर्ष 2020-21 रुपये के लिए उतार-चढ़ाव भरा साल रहा। इक्विटी बाजार में महामारी के कारण व्यापक स्तर पर बिकवाली से रुपया एक समय 76.90 तक चला गया था। हालांकि टीका आने से उम्मीद बढ़ने, लॉकडाउन पाबंदियों में ढील, सरकारों और केंद्रीय बैंकों द्वारा दुनिया भर में प्रोत्साहन उपायों से निवेशकों में एक भरोसा पैदा हुआ और रुपया 72 के स्तर पर आ गया।
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इस संदर्भ में एचडीएफसी सिक्योरिटीज के उप-प्रमुख (खुदरा शोध) देवर्ष वकील ने कहा कि, 'अमेरिका के मुकाबले अधिक ब्याज दर और मुद्रस्फीति के बावजूद 2020-21 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया चार फीसदी मजबूत हुआ।'

पहले नौ महीनों में सर्वाधिक रहा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
विशेषज्ञों के अनुसार देश के सूचीबद्ध शेयरों में लगातार पूंजी प्रवाह बने रहने से भारतीय मुद्रा के लिए एक मजबूत वर्ष सुनिश्चित हुआ है। चालू वित्त वर्ष में विदेशी निवेशकों ने 35.22 अरब डॉलर की पूंजी लगाई। यह 2014-15 के बाद सर्वाधिक है। भारत ने 2020-21 के पहले नौ महीनों में 67.54 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया जो अबतक का सर्वाधिक है।

रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक श्रीराम अय्यर ने कहा कि, 'रुपये में उतार-चढ़ाव कोई अचंभित करने वाला नहीं है क्योंकि रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति के जरिए और विदेशी विनिमय बाजार में जरूरी हस्तक्षेप कर रुपये को जरूरी समर्थन दिया। इसके अलावा रुपये को घरेलू शेयर बाजार में लगातार पूंजी प्रवाह से भी समर्थन मिला।'

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