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देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बना वॉर रूम, 90 लोगों की टीम 24 घंटे कर रही देखभाल

Mon, 23 Mar 2020 05:37 AM IST
श्रीधर मिश्रा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तेजी के साथ खुला शेयर बाजार - फोटो : File
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आरबीआई ने कोरोना वायरस के संक्रमण से अपने कर्मचारियों को बचाने और देश की वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए महज एक दिन में ‘वार रूम’ स्थापित कर दिया। आपात स्तर पर बनाए गए इस वार रूम को रिजर्व बैंक के 90 महत्वपूर्ण कर्मचारी चला रहे हैं। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि केंद्रीय बैंक ने यह व्यवस्था आकस्मिक कार्य योजना (बीसीपी) के  तहत तैयार की है। 19 मार्च से काम कर रहा वार रूम 24 घंटे सक्रिय रहता है। 

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इस कक्ष में रिजर्व बैंक के 90 सबसे महत्वपूर्ण लोग काम कर रहे हैं। इनके अलावा बाहरी वेंडरों के 600 मुख्य कर्मियों में से 60 को शामिल किया गया है जबकि अन्य सुविधाओं के लिए भी 70 लोग वार रूम में काम कर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, आरबीआई ने देश की वित्तीय प्रणाली के साथ अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई है जिसमें एक समय में वार रूम के लिए 45 कर्मचारी ही काम करते हैं। शेष 45 कर्मचारियों को बोझ बढ़ने या किसी आपात स्थिति के लिए रखा जाता है।

दुनिया में पहली बार ऐसी व्यवस्था

अधिकारी ने बताया कि यह भारत सहित दुनिया में पहली बार है जब किसी भी केंद्रीय बैंक ने इस तरह की बीसीपी पर अमल किया है। सामान्य बीसीपी सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर की दिक्कतों, आग लगने तथा प्राकृतिक आपदाओं के लिए होता है। इस तरह की योजना किसी के पास नहीं है जैसी रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस महामारी के लिए तैयार की है। सामान्य तौर पर रिजर्व बैंक अरबों लेनदेन का प्रबंधन करता है और इसके केंद्रीय व 31 क्षेत्रीय कार्यालयों में करीब 14 हजार लोग काम करते हैं। अभी जिन सेवाओं को वार रूम से संभाला जा रहा है, अमूमन इसके प्रबंधन में 1,500 लोग काम करते हैं। फिलहाल एक सप्ताह से महज 10 फीसदी कर्मचारी ही आ रहे हैं।
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इन सेवाओं पर वार रूम की नजर

इस वार रूम में ऋणपत्र प्रबंधन, भंडार प्रबंधन और मौद्रिक परिचालन का काम संभाला जाता है। बीसीपी के तहत आरबीआई संरचित वित्तीय संदेश प्रणाली, आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं संभाल रहा है। इसके अलावा ई-कुबेर की भी व्यवस्था की गई है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों के लेनदेन और एक बैंक से दूसरे बैंक के बीच लेनदेन की देखरेख की जा रही है।
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