अधिकारी ने बताया कि यह भारत सहित दुनिया में पहली बार है जब किसी भी केंद्रीय बैंक ने इस तरह की बीसीपी पर अमल किया है। सामान्य बीसीपी सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर की दिक्कतों, आग लगने तथा प्राकृतिक आपदाओं के लिए होता है। इस तरह की योजना किसी के पास नहीं है जैसी रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस महामारी के लिए तैयार की है। सामान्य तौर पर रिजर्व बैंक अरबों लेनदेन का प्रबंधन करता है और इसके केंद्रीय व 31 क्षेत्रीय कार्यालयों में करीब 14 हजार लोग काम करते हैं। अभी जिन सेवाओं को वार रूम से संभाला जा रहा है, अमूमन इसके प्रबंधन में 1,500 लोग काम करते हैं। फिलहाल एक सप्ताह से महज 10 फीसदी कर्मचारी ही आ रहे हैं।
इस वार रूम में ऋणपत्र प्रबंधन, भंडार प्रबंधन और मौद्रिक परिचालन का काम संभाला जाता है। बीसीपी के तहत आरबीआई संरचित वित्तीय संदेश प्रणाली, आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं संभाल रहा है। इसके अलावा ई-कुबेर की भी व्यवस्था की गई है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों के लेनदेन और एक बैंक से दूसरे बैंक के बीच लेनदेन की देखरेख की जा रही है।