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20 मई को खुलेगा रिलायंस का राइट्स इश्यू, तीन जून तक सब्सक्रिप्शन का मौका

Sat, 16 May 2020 10:56 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का राइट्स इश्यू 20 मई को खुलेगा और तीन जून को बंद होगा।
  • मुकेश अंबानी की कंपनी ने 30 अप्रैल को राइट्स इश्यू के जरिए 53,125 करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा की थी।
  • यह देश का सबसे बड़ी रकम का राइट्स इश्यू है।
  • यह लगभग तीन दशक में आरआईएल द्वारा लाया जा रहा इस तरह का पहला निर्गम है। 
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Mukesh Ambani - फोटो : TWITTER
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देश के धनकुबेर मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) का 53,125 करोड़ रुपये का भारत का सबसे बड़ा राइट्स इश्यू 20 मई को खुलेगा और तीन जून को बंद होगा। मुकेश अंबानी की कंपनी ने 30 अप्रैल को राइट्स इश्यू के जरिए 53,125 करोड़ रुपये जुटाने की घोषणा की थी। यह देश का सबसे बड़ी रकम का राइट्स इश्यू है। यह लगभग तीन दशक में आरआईएल द्वारा लाया जा रहा इस तरह का पहला निर्गम है। 

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निर्गम के तहत एक शेयर की कीमत 1,257 रुपये
निर्गम के तहत एक शेयर की कीमत 1,257 रुपये होगी। शुक्रवार को रिलायंस का शेयर राइट्स इश्यू के मुकाबले 16 फीसदी ऊपर 1458.90 के स्तर पर बंद हुआ था। इस निर्गम के तहत प्रत्येक 15 शेयर पर एक शेयर की पेशकश की जाएगी। 

आरआईएल के 15 शेयरों पर एक शेयर राइट्स इश्यू के तहत दिया जाएगा। कंपनी दस रुपये का शेयर 1247 रुपये प्रीमियम पर कुल 1257 रुपये पर देगी।
 राइट्स इश्यू की रिकार्ड तिथि 14 मई है। इश्यू के आवेदन के समय आवेदकों को 25 फीसदी राशि देनी होगी। इसमें ढाई रुपया फेस वैल्यू का और 311.75 रुपये प्रीमियम का कुल 314.25 रुपये देना होगा। शेष 942.75 रुपये की राशि एकमुश्त या किस्तों में ली जाएगी।
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क्या है राइट्स इश्यू?
दरअसल पूंजी जुटाने के लिए शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां राइट्स इश्यू लाती हैं। राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने के लिए मंजूरी देती हैं। शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में शेयर खरीद सकते हैं, जो कंपनी तय करती है। यानी शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। हालांकि इसके जरिए कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।

राइट्स पेशकश के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों को घटी दरों पर नए शेयर खरीदने का अधिकार देती हैं, लेकिन उन पर ऐसा करने की बाध्यता नहीं होती। आरआईएल ने अंतिम बार 1991 में परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी कर जनता से धन जुटाया था।

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