देश में प्याज के दाम में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए प्याज उत्पादकों ने अब नेशनल एग्रीकल्चर कॅपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) से प्याज की खरीदारी करने की मांग की है।
देश में इस साल प्याज के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 13.8 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है और निर्यात मांग में विशेष मजबूती नहीं होने से घरेलू बाजार में प्याज की कीमत 300 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गई है।
प्याज के उत्पादक राज्यों खासकर महाराष्ट्र में प्याज के थोक भाव 200 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गए हैं। मंगलवार को दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज की कीमत 350-850 रुपये प्रति क्विंटल रही। प्याज की गिरती कीमतों को देखते हुए अब प्याज किसानों ने नेफेड से 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज की खरीदारी करने की मांग की है ताकि उनके घाटे की भरपाई हो सके। अभी नेफेड 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज की खरीदारी कर रहा है।
नेफेड सरकारी एजेंसी है, जो प्याज की सरकारी खरीद करता है। पिछले साल बगैर मौसम की बारिश होने से प्याज की फसल खराब हो गई थी और सरकार ने घरेलू कीमत पर नियंत्रण रखने के लिए प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी थी। प्याज उत्पादकों के मुताबिक सरकार ने घरेलू कीमत पर नियंत्रण के लिए यह फैसला किया था, लेकिन इससे उनकी अंतरराष्ट्रीय बिक्री प्रभावित हो गई।
अब उनके विदेशी खरीदार भारतीय प्याज विक्रेताओं से प्याज की खरीदारी करने में हिचक रहा है। यही वजह है कि भारी उपलब्धता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत से काफी मात्रा में प्याज का निर्यात नहीं हो पा रहा है। इस कारण मजबूरन प्याज किसानों को प्याज की बिक्री के लिए घरेलू मंडी का रुख करना पड़ रहा है जहां मांग के मुकाबले उपलब्धता अधिक होने से प्याज के दाम में कमी आ रही है।