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पहले सरकारों ने बढ़ाया तेल पर टैक्स, अब कंपनियां ग्राहकों से वसूल रहीं घाटा

Wed, 10 Jun 2020 07:46 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • वैश्विक बाजार में सस्ता है कच्चा तेल, देश में उत्पाद कर और वैट की मार
  • 1.74 रुपये महंगा हो चुका है पेट्रोल तीन दिन के भीतर
  • कच्चे तेल के दाम 41.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं
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petrol pump - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग तीन महीने तक स्थिर रहने के बाद एक बार फिर उछाल मारने लगी हैं। मंगलवार को लगातार तीसरे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम में बड़ा इजाफा हुआ है। पिछले तीन महीने में जब दाम स्थिर थे तो सरकारों ने तेल पर टैक्स बढ़ाकर अपना खजाना भरा और अब कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों से वसूली कर रही हैं।

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दरअसल, सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को विनियमित कर रखा है। यानी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी या कमी के आधार पर घरेलू बाजार में इसकी कीमत तय की जाती है। हालांकि, इस समय वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम 41.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं।



बावजूद इसके खुदरा बाजार में रविवार और सोमवार को जहां पेट्रोल 60-60 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ, वहीं मंगलवार को 54 पैसे दाम बढ़े। इस तरह, तीन दिनों में 1.74 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल 73 रुपये लीटर तो मुंबई में 80.01 रुपये लीटर पहुंच गया है। डीजल भी इस दौरान पौने दो रुपये महंगा हो चुका है।
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वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में गिरावट का लाभ सरकार ने उपभोक्ताओं को देने के बजाए उत्पाद शुल्क और वैट बढ़ाकर खुद ले लिया। सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल-डीजल पर 3 रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ाया था और कंपनियों ने दैनिक समीक्षा रोक दी थी। इसके बाद 6 मई को फिर पेट्रोल पर 10 रुपये लीटर और डीजल पर 13 रुपये लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया। अलग-अलग राज्यों ने इस पर वैट भी बढ़ा दिया था।

19 रुपये के पेट्रोल पर 53 रुपये टैक्स

फिलहाल रिफाइनरी से निकले प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 19 रुपये है। इस पर लगभग 35 रुपये उत्पाद शुल्क लगता है और 18 रुपये राज्य सरकार का वैट। साथ में ढुलाई भाड़ा और डीलर कमीशन मिलाकर यह उपभोक्ताओं को दिल्ली में 73 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।

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क्रूड 1 डॉलर सस्ता तो 29 हजार करोड़ की बचत

भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत एक डॉलर सस्ती होने पर देश को 29 हजार करोड़ की बचत होती है और उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर 50 पैसे कम चुकाने पड़ते हैं। यानी हर 10 डॉलर सस्ता होने से देश को 2.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • दो साल में नौ बार बढ़ा उत्पाद शुल्क
नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने 9 बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया। यानी 2014 से 2018-19 तक केंद्र ने तेल पर टैक्स के जरिये 10 लाख करोड़ कमाए। राज्य सरकारों ने भी पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाकर 2014-15 में 1.3 लाख करोड़ कमाया तो 2017-18 में 1.8 लाख करोड़ वसूला। इस बार भी जब कीमतें घटनी शुरू हुई तो केंद्र सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया।
  • पाकिस्तान में हमसे आधी कीमत
पिछले सप्ताह पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमश: 15 और 27 पाकिस्तानी रुपये की कटौती की थी। इससे वहां पेट्रोल के दाम गिरकर 74.52 रुपये प्रति लीटर हो गए थे। भारत के एक रुपए में पाकिस्तान के 2.15 रुपये आते हैं। यानी भारतीय करेंसी में पाकिस्तान में पेट्रोल 34.66 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। हालांकि, बांग्लादेश में इसका दाम 79.46, नेपाल में 60 और भूटान में 71 रुपये प्रति लीटर है।
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