भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत एक डॉलर सस्ती होने पर देश को 29 हजार करोड़ की बचत होती है और उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर 50 पैसे कम चुकाने पड़ते हैं। यानी हर 10 डॉलर सस्ता होने से देश को 2.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- दो साल में नौ बार बढ़ा उत्पाद शुल्क
नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने 9 बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया। यानी 2014 से 2018-19 तक केंद्र ने तेल पर टैक्स के जरिये 10 लाख करोड़ कमाए। राज्य सरकारों ने भी पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाकर 2014-15 में 1.3 लाख करोड़ कमाया तो 2017-18 में 1.8 लाख करोड़ वसूला। इस बार भी जब कीमतें घटनी शुरू हुई तो केंद्र सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया।
- पाकिस्तान में हमसे आधी कीमत
पिछले सप्ताह पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमश: 15 और 27 पाकिस्तानी रुपये की कटौती की थी। इससे वहां पेट्रोल के दाम गिरकर 74.52 रुपये प्रति लीटर हो गए थे। भारत के एक रुपए में पाकिस्तान के 2.15 रुपये आते हैं। यानी भारतीय करेंसी में पाकिस्तान में पेट्रोल 34.66 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। हालांकि, बांग्लादेश में इसका दाम 79.46, नेपाल में 60 और भूटान में 71 रुपये प्रति लीटर है।