म्यूचुअल फंड कंपनियों ने बीते साल 2021 में कोरोना वायरस महामारी के बावजूद 72 लाख फोलियो जोड़े। ऊंची खर्च योग्य आय और बैंक जमा पर कम ब्याज की वजह से निवेशकों का म्यूचुअल फंड के प्रति आकर्षण बढ़ा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने यह जानकारी दी है। इसकी तुलना में 2019 में म्यूचुअल फंड उद्योग ने 68 लाख फोलियो जोड़े थे।
एक निवेशक के हो सकते हैं कई फोलियो
मालूम हो कि फोलियो वह संख्या है जो व्यक्तिगत निवेशक खाते को दी जाती है। एक निवेशक के कई फोलियो हो सकते हैं। एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2021 के अंत तक 45 म्यूचुअल फंड कंपनियों के कुल फोलियो की संख्या 72 लाख बढ़कर 9.43 करोड़ पर पहुंच गई। दिसंबर 2019 के अंत तक यह 8.71 करोड़ थी। माईवेल्थग्रोथ.कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला ने कहा कि 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बाजार में 'करेक्शन' और सुधार के चरण में निवेशकों ने अपने म्यूचुअल फंड निवेश को बढ़ाया।'
इसलिए हुआ फोलियो की संख्या में इजाफा
आगे उन्होंने कहा कि, 'पहली बार के निवेशकों ने भी इस दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश किया। वहीं मौजूदा निवेशकों ने अपने निवेश का नई योजनाओं में विविधीकरण किया। इन दोनों वजहों से फोलियो की संख्या में इजाफा हुआ।' उन्होंने कहा कि यह संख्या और अधिक हो सकती थी, लेकिन निवेशकों के एक वर्ग ने मुनाफावसूली भी की।
ग्रो के सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हर्ष जैन ने कहा कि डिजिटल निवेश मंचों की वजह से खाता खोलना आसान हो गया है। इससे निवेशकों की म्यूचुअल फंड तक पहुंच सुगम हुई है।
क्या है म्यूचुअल फंड?
निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड को जान लेना बहुत जरूरी है। इससे आपको निवेश के फैसले लेने में मदद मिलेगी। म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाती हैं। इस पैसे को वे शेयरों में निवेश करती हैं। इसके बदले निवेशकों से चार्ज भी लेती हैं। जो लोग शेयर बाजार में निवेश के बारे में बहुत नहीं जानते, उनके लिए म्यूचुअल फंड निवेश का अच्छा विकल्प है। निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से म्यूचुअल फंड स्कीम चुन सकते हैं।