गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझानों और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण हुई। विदेशी फंड की लगातार निकासी भी बाजार पर भारी पड़ी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार के लिए चुनौतियां अधिक हैं। पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिक्री बाजार पर दबाव डाल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में तेजी का माहौल है। यह भारत से और अधिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिक्री का संकेत देता है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को निचले स्तर पर बंद हुए थे।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम समझौते के नवीनीकरण से कुछ राहत मिली है। हालांकि, व्यापक चिंताएं अभी भी अनसुलझी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार शत्रुता बनी हुई है। हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी जवाबी कार्रवाई की रिपोर्टों ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। राजनयिक समाधान की दिशा में ठोस प्रगति की कमी बाजार को भू-राजनीतिक सुर्खियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। इसका विशेष रूप से ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार प्रवाह पर प्रभाव पड़ता है।
बाजार पर दबाव के मुख्य कारणों में वैश्विक स्तर पर कमजोर रुझान शामिल हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार इक्विटी बेचना भी बाजार को नीचे खींच रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी वैश्विक आर्थिक चिंताओं को दर्शाती है। इन सभी कारकों के कारण भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई। निवेशकों को निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बने रहने की आशंका है।