शेयर बाजार नियामक सेबी ने कर्ज के डिफॉल्ट पर सख्त रुख अपनाते हुए कई बड़े बदलावों का एलान किया है। इसके तहत सूचीबद्ध कंपनियों को कर्ज के मूलधन और ब्याज के डिफॉल्ट में 30 दिन से ज्यादा होने पर तुरंत बाजार नियामक को सूचना देनी होगी। इसके अलावा पोर्टफोलियो प्रबंधकों के साथ शेयरों के राइट इश्यू से जुड़े कई नियमों में भी बदलाव किया गया है। सेबी ने बुधवार को हुई बोर्ड बैठक में ऐसे कई प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
इसके अलावा अब व्यावसायिक दायित्व रिपोर्ट (बीआरआर) देना शीर्ष 1,000 कंपनियों के लिए जरूरी हो गया है, जबकि अबी तक 500 कंपनियों के लिए ऐसा करना जरूरी था। नियामक ने बोर्ड बैठक के बाद कहा कि अगर कर्ज के डिफॉल्ट को 30 दिन से ज्यादा वक्त हो जाता है तो सूचीबद्ध कंपनियों को ऐसे डिफॉल्ट के बारे में ‘ऐसे डिफॉल्ट की हकीकत’ के बारे में 24 घंटे के भीतर खुलासा करना होगा।
बैठक में हुए एक फैसले के क्रम में सेबी मौजूदा शेयरधारकों को राइट इश्यू जारी करने से जुड़े नियमों में संशोधन करेगा। इसकी समयसीमा को 55 दिन से घटाकर 31 दिन कर दिया गया है। बाजार नियामक ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए जरूरी नियमों में संशोधन किया जाएगा, जहां ऐसी इकाइयों के लिए नेटवर्थ और न्यूनतम निवेश जरूरतों में इजाफा किया जाएगा।
कर्ज के डिफॉल्ट पर नए खुलासा (डिसक्लोजर) नियमों पर सेबी चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि ‘निवेशकों की मदद के वास्ते ज्यादा स्पष्टता’ लाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।