दुनियाभर के बाजारों का हाल
- अमेरिकी बाजारों में तेजी रही। नासडैक 2.5 फीसदी, डाउ जोंस एक फीसदी और एसएंडपी-500 1.5 फीसदी बढ़त के साथ बंद हुए।
- एशियाई बाजारों में जापान के निक्केई में 0.4 फीसदी और दक्षिण कोरिया के कॉस्पी में 0.2 फीसदी तेजी रही। हांगकांग के हैंगसेंग में 2.2 फीसदी और शंघाई कंपोजिट में 0.6 फीसदी गिरावट रही।
- प्रमुख यूरोपीय बाजारों में भी तेज गिरावट का रुख रहा।
गिरावट के अन्य प्रमुख कारण
- मजबूत हिस्सेदारी रखने वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड के शेयरों में भारी बिकवाली।
- बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विस नेशनल बैंक के 15 साल में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है।
- मंदी की आशंका ने वैश्विक धारणा को प्रभावित किया। इससे घरेलू बाजार पर भी दबाव बढ़ा।
- विदेशी संस्थागत निवेश लगातार पूंजी निकासी कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने 3,257.65 करोड़ के शेयर बेचे।
फेड रिजर्व के फैसले से मंदी की आशंका बढ़ी
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए हरसंभव कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। फेडरल रिजर्व के इस रुख से मंदी की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका में महंगाई चार दशक के रिकॉड स्तर पर पहुंच गई है। फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज में 0.75 फीसदी की वृद्धि की है। इससे दर 1.5 से 1.75 फीसदी के बीच हो गई है।
- बैंक ऑफ इंग्लैंड ने भी अपनी प्रमुख ब्याज दरों को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया है। वस्तुओं की कीमतों में उछाल के साथ ब्रिटेन में महंगाई 40 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
- बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अक्तूबर के लिए अपने महंगाई दर अनुमान को भी बढ़ाकर 11 फीसदी कर दिया है। अप्रैल में यह 9 फीसदी थी, जो 1982 के बाद सर्वाधिक है। बैंक का संतोषजनक स्तर 2 फीसदी है।