भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती और क्रेडिट रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में कमी के बाद, ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टरों में लाभ के आसार हैं। नेक्सएज की रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग, गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी), रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक रुझान आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उधार लेने की लागत में गिरावट होने से, इन दर- संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत ऋण प्रवाह, कम वित्त पोषण लागत और मजबूत मांग देखने को मिल सकता है।
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बैंकिंग- सीआरआर में कटौती होने से, बैंकों का अधिक फंड बचेगा, जिसे वे लोन, निवेश या अन्य व्यापारिक गतिविधियों में लगा सकते हैं। वे ग्राहकों को सस्ती दरों पर कर्ज दे पाएंगे। बैंकों से लोन लेने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी। बैंकों की नेट इंट्रेस्ट मार्जिन (एनआईएम) से होने वाली आय बढ़ेगी।
गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं- ब्याज दरें घटने पर बैंक खुद एनबीएफसी को ज्यादा और रियायती दरों पर कर्ज दे पाएंगे। एनबीएफसी की कार्यशील पूंजी की लागत घटेगी, जिससे मुनाफा बढ़ेगा। यह अपने ग्राहकों को सस्ती दर पर कर्ज दे पाएंगे। इस कटौती से निवेशकों का ध्यान इनकी तरह आकर्षित होगा, इससे शेयरों की मांग बढ़ जाएगी। इनकी मार्केट वैल्यू में सुधार होने के साथ-साथ पूंजी जुटाना आसान होगा।