वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी दर घटकर 7.1 फीसदी रह गई। यह पहली तिमाही में 8.2 फीसदी थी। इस हिसाब से इसमें 1.1 फीसदी की कमी देखने को मिली है। हालांकि एक साल पहले की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 6.3 प्रतिशत था।
आर्थिक सलाहकारों की माने तो जीडीपी में यह कमी दो मुख्य कारणों से आई है। पहला डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना और दूसरा आईएलएंडएफएस में नकदी सकंट, जिसकी वजह से निवेश पर असर देखने को मिला।
चीन से आगे
हालांकि देश की जीडीपी अभी भी पड़ोसी देश चीन से आगे है। चीन की जीडीपी 6.7 फीसदी रही, जो भारत से बहुत कम है। भारत की जीडीपी विश्व के कई अन्य देशों की जीडीपी से फिलहाल आगे बनी हुई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का अनुमान 7.4 फीसदी रखा है।
बता दें कि भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट में विकास दर 7.5 से 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। रॉयटर्स पोल में भी विशेषज्ञों ने पहली तिमाही के मुकाबले गिरावट का अनुमान लगाया था।
अक्टूबर में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक के उत्पादन में कमी से आठ बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों की वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही। प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर एक साल पहले अक्टूबर में 5 प्रतिशत रही थी, जबकि 2018 सितंबर में 4.3 फीसदी।
वहीं वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़े के मुताबिक अक्टूबर महीने में कच्चा तेल में 5 प्रतिशत, उर्वरक उत्पादन में 11.5 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 0.9 प्रतिशत की कमी आई। दूसरी तरफ सीमेंट बिजली और कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई।