नए प्रोजेक्ट्स (सप्लाई) और बिना बिके घरों (इन्वेंट्री) का क्या गणित है?
सप्लाई यानी नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में क्षेत्रीय स्तर पर काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। H1CY26 के दौरान बाजार में कुल सप्लाई में नौ फीसदी की बढ़ोतरी हुई। MMR, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद में नई लॉन्चिंग में 10 से 43 फीसदी की तेजी आई। वहीं, NCR और चेन्नई में नए प्रोजेक्ट्स 21 से 34 फीसदी तक घट गए। डिमांड और सप्लाई दोनों पैमानों पर शानदार वृद्धि के साथ बेंगलुरु सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला बाजार बन गया है।
बिना बिके घरों की बात करें, तो राष्ट्रीय स्तर पर यह 20 महीने के स्तर पर स्थिर है। प्रमुख बाजारों में पुणे सबसे बेहतर स्थिति में है, जहाँ इन्वेंट्री केवल 14 महीने की है। अन्य शहरों में यह 17 से 22 महीने के बीच है, जबकि हैदराबाद में बिना बिके घरों का भंडार सबसे ज्यादा (29 महीने) है।
क्या घरों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है?
बिल्कुल। लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में लगातार बनी हुई मजबूत मांग के कारण दूसरी तिमाही (Q2CY26) में सभी प्रमुख शहरों में घरों के दाम बढ़े हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में चेन्नई सबसे आगे रहा, जहां सालाना आधार पर 20 फीसदी का भारी जंप देखने को मिला। इसके अलावा, अन्य बड़े शहरों में भी प्रॉपर्टी के दामों में चार से आठ फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
रियल एस्टेट सेक्टर के भविष्य और शेयरों के लिए क्या है आउटलुक?
नुवामा रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मुख्य रूप से 'वॉल्यूम ग्रोथ' यानी बिकने वाले घरों की संख्या पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट में बिल्डरों को साफ सलाह दी गई है कि बिक्री की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए उन्हें अपना फोकस सिर्फ 'लग्जरी सेगमेंट' से हटाकर 'मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट' की तरफ मोड़ना होगा। साथ ही, कीमतों और टिकट साइज को सीमित रखकर अफोर्डेबिलिटी बरकरार रखना सबसे जरूरी होगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि एनसीआर के बाजार में, विशेषकर पांच से 10 करोड़ रुपये वाले ब्रैकेट में, अभी और चुनौतियां बनी रहेंगी। वहीं, बेंगलुरु और चेन्नई लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में हैं।
रियल एस्टेट बाजार का यह रुख स्पष्ट करता है कि खरीदार अब बहुत सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं। जहां बेंगलुरु और चेन्नई जैसे आईटी हब मिड-सेगमेंट और प्रीमियम घरों की मांग के कारण उड़ान भर रहे हैं, वहीं एनसीआर के बाजार को वापसी करने के लिए डेवलपर्स को अपनी रणनीति और प्राइसिंग में बड़ा बदलाव करना होगा।