भारत ने वैश्विक तेल बाजार को संतुलित रखने के लिए रूस से तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का दबाव डाला है। भारत ने कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति और कीमतों को उचित स्तर पर बनाए रखने के मकसद से यह कदम उठाया है।
भारत अपने कच्चे तेल की जरूरतों का 83 फीसदी आयात करता है। इसका करीब 85 फीसदी हिस्सा ओपेक देशों से आता है। इसके अलावा, भारत 80 फीसदी गैस भी इन्हीं देशों से आयात करता है। भारत का मानना है कि ओपेक की कच्चे तेल की कीमतों और उपलब्धता को निर्धारित करने में रूस की बड़ी भूमिका है।
प्रधान ने नोवाक के साथ भारतीय कंपनियों की रूस के तेल एवं गैस क्षेत्र में अधिक निवेश करने की इच्छा पर भी बातचीत की है। उन्होंने भारत में तेल एवं गैस की खोज तथा उत्पादन (ईएंडपी), तेल शोधन , पेट्रोकेमिकल्स और एलएनजी आयात सुविधाओं में रूसी निवेश की भी मांग की।