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विदेशी निवेश की मदद से भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, एफडीआई को लेकर बड़े बदलाव

Mon, 20 Jun 2016 08:13 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI
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 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मदद से भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने और अधिक से अधिक रोजगार सृजन के उद्देश्य से सरकार ने सोमवार को एफडीआई के क्षेत्र में कई बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी। विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सबसे बड़ा फैसला रक्षा और नागरिक विमानन क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी देना रहा। वर्ष 2013 में भी रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक रक्षा क्षेत्र में एफडीआई का कोई भी प्रस्ताव नहीं आने से सरकार ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के लिए तकनीकी ट्रांसफर के नियमों को भी समाप्त कर दिया।
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पहले रक्षा क्षेत्र में निवेश के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी अनिवार्य था। नागरिक विमानन क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई से खाड़ी की कई विमानन कंपनियों को फायदा होगा जो पहले से ही भारतीय विमानन क्षेत्र में दिलचस्पी दिखा रही हैं।

महत्वपूर्ण फैसले में सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई के तहत रिटेल स्टोर खोलने वाली कंपनियों को स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग से खरीदारी पर पहले तीन साल और इसके बाद पांच साल के लिए छूट देना भी शामिल है। पहले के नियम के मुताबिक इस प्रकार के रिटेल स्टोर खोलने वालों को स्थानीय छोटे उद्यमियों से 30 फीसदी की खरीदारी करना अनिवार्य था। सरकार के इस फैसले के साथ ही देश में एप्पल के रिटेल स्टोर खोलने का रास्ता साफ हो गया। हाल ही में एप्पल के सीईओ टीम कुक ने भारत आकर स्थानीय उद्यमियों से 30 फीसदी की खरीदारी की छूट में ढील देने की मांग की थी।
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वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निवेश के साथ रोजगार की काफी गुंजाइश है और इससे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्त के साथ निवेश को आकर्षित करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में उत्पादित खाद्य पदार्र्थों की मार्केटिंग में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत से किसानों को सही कीमत मिलेगी और बैक एंड यानी की कोल्ड चेन, स्टोरेज की सुविधाएं बढ़ेंगी।

देश में डिजिटल क्रांति को साकार करने के लिए सोमवार को टेलीपोट्र्स, डायरेक्ट टू होम, केबल नेटवर्क, मोबाइल टीवी व हेडएंड-इन-दि ब्राडकास्टिंग सर्विस में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी दे दी गई। 

फार्मा के क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ब्राउनफील्ड फार्मा केक्षेत्र में सरकारी मंजूरी के साथ 100 फीसदी एफडीआई तो ग्रीनफील्ड फार्मा में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत दे दी गई।

नागरिक विमानन के ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई तो ब्राउनफील्ड परियोजना में ऑटोमेटिक रूट से 74 फीसदी की इजाजत दी गई है।     
भारत में बनने वाले खाद्य उत्पादों पर 100 फीसदी विदेशी निवेश को सरकार ने मंजूरी दी है। इसमें ई-कॉमर्स के उत्पाद भी शामिल होंगे। पशुपालन में भी केंद्र सरकार ने 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी दी गई है। वहीं निजी सुरक्षा एजेंसी के क्षेत्र में सरकारी रूट से 49 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गई है।

एफडीआई फैसला अर्थव्यवस्था के लिए अति महत्वपूर्ण

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में सरकार की तरफ सोमवार को लिए गए फैसले को औद्योगिक संगठनों ने निवेश के मामले में अति महत्वपूर्ण करार दिया है। औद्योगिक संगठन सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा है कि कारोबारी सुगमता व अन्य सुधारवादी कदम के बाद सोमवार को घोषित एफडीआई नियमों से खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा, फार्मा, नागरिक विमानन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश आएंगे। इसके फलस्वरूप विकास होने के साथ नए रोजगार भी निकलेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत में उत्पादित खाद्य उत्पाद की मार्केटिंग में एफडीआई लाने से खाद्य क्षेत्र के रिटेल चेन में नए निवेश होंगे और संगठित क्षेत्रों के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि सिंगल ब्रांड रिटेल में स्थानीय खरीदारी के नियमों में ढील से विश्व स्तरीय एडवांस टेक्नोलॉजी वाली कंपनियां देश में आएंगी।

औद्योगिक संगठन एसोचैम ने कहा है कि एफडीआई सीमा को 100 फीसदी करने से रक्षा क्षेत्र में स्वाबलंबी होने का भारत का सपना साकार हो सकेगा। एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत के मुताबिक रक्षा क्षेत्र में निवेश की भारी गुंजाइश है और रक्षा में एफडीआई से  निवेश के साथ एडवांस टेक्नोलॉजी भी आएगी। उन्होंने नागरिक विमानन और फार्मा क्षेत्र में एफडीआई के नए नियमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारतीय फार्मा क्षेत्र को रिसर्च व अनुसंधान में काफी मदद मिलेगी।

औद्योगिक संगठन फिक्की के महासचिव ए.दीदार सिंह ने कहा कि रक्षा व नागरिक विमानन जैसे क्षेत्र में एफडीआई के नियमों को और सरल बनाना देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी सकारात्मक कदम है। वैश्विक स्तर पर निवेश को आकर्षित करने के लिए हमारी सरकार अपने शब्दों को कार्यवाही में बदल रही है।

विनिर्माण को बढ़ावा देगी नई एफडीआई नीति

वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति देश में विनिर्माण को बढ़ावा को बढ़ावा देगी और इससे रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। नई एफडीआई नीति की घोषणा होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में शक्तिकांत दास ने बताया कि इस उदार एफडीआई नीति से वह देश में विनिर्माण गतिविधियों, खास कर रक्षा क्षेत्र के विनिर्माण में बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं। इन गतिविधियों से देश में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी। 

उन्होंने बताया कि सोमवार को जो एफडीआई नीति की घोषणा हुई है, वह पिछले वर्ष के नवंबर माह में घोषित एफडीआई नीति का फॉलो-अप है। उस समय इस क्षेत्र में सुधार की पूरी श्रृंखला की घोषणा हुई थी। इस साल के बजट में भी शेयर बाजारों और नॉन बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए कुछ छूट की घोषणा हुई। शक्तिकांत दास के मुताबिक संशोधित नियमों में नियामक से ही अनुमोदन मिल जाता है और इसके लिए कंपनियों को विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं पड़ती है। 
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जयराम रमेश ने कहा कि एफडीआई नहीं घरेलू उत्पाद बढ़ाने बढ़ाने की जरूरत

कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने  की कोशिश की। आरोप लगाया कि विजय माल्या और ललित मोदी को भारत लाने की सरकार की मंशा नहीं है। वह इन दोनों को लाना ही नहीं चाहती। 

कांग्रेस केवरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने  पार्टी  मुख्यालय में  पत्रकार वार्ता  में  कहा कि  करोड़ों  रुपये लेकर गायब विजय माल्या  सार्वजनिक तौर पर कार्यक्रमों में दिखाई  दे रहा है और सरकार को इससे कोई मतलब नहीं हैं।  एक तरह से सरकार के पास उन्हें वापस लाने की कोई  योजना नहीं हैं। आरोप लगाया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज केरविवार के बयान से भी साफ है कि  केंद्र सरकार ललित मोदी का प्रत्यार्पन ही नहीं  चाहती। 

एफडीआई नहीं धरेलू उत्पाद बढ़ाने की जरूरत..

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि  एफडीआई  के लिए  सरकार की तरफ से उठाया कदम हड़बड़ाहट में  लिया गया निर्र्णय है।  आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एफडीआई  को इस तरह पेश कर रही है जैसे हर आर्थिक समस्या का हल यही हो। जबिक इस वक्त एफडीआई से ज्यादा घरेलू उत्पाद बढ़ाने  की ज्यादा जरूरत है। 
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