हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को चांदी वायदा बाजार में ₹2.32 लाख प्रति किलो के नए रिकॉर्ड पर पहुंची, जबकि सोना पहली बार ₹1.39 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया। वैश्विक अनिश्चितताओं, सुरक्षित निवेश की मांग और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने-चांदी में तेज खरीदारी देखी गई।
कीमती धातुओं में शुक्रवार को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी जारी रखते हुए चांदी वायदा बाजार में ₹8,951 की छलांग लगाकर ₹2,32,741 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में चांदी के दाम 75 डॉलर प्रति औंस के पार निकलने से घरेलू बाजार में भी जोरदार खरीदारी दिखी।
नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में मची तेजी और साल के अंत में जबरदस्त खरीदारी के चलते भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी ने आज इतिहास रच दिया। शुक्रवार को दिल्ली में चांदी की कीमतों में 9,350 रुपये की भारी उछाल दर्ज की गई, जिससे यह 2,36,350 रुपये प्रति किलोग्राम के नए सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time high) पर पहुंच गई।
ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र (बुधवार) में चांदी 2,27,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। केवल पिछले चार सत्रों की बात करें तो 19 दिसंबर के बाद से चांदी में 32,250 रुपये (15.8%) की तेजी आ चुकी है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह साल चांदी के निवेशकों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं रहा। 31 दिसंबर, 2024 को चांदी 89,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी, जो अब तक इस कैलेंडर वर्ष में 1,46,650 रुपये (163.5%) बढ़ चुकी है।
चांदी के साथ-साथ सोने ने भी अपनी चमक बिखेरी है। स्थानीय बाजार में 99.9% शुद्धता वाला सोना 1,500 रुपये की छलांग लगाकर 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में यह 1,40,800 रुपये पर बंद हुआ था। इस साल सोने ने अब तक करीब 80% का रिटर्न दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का माहौल बना रहा। कॉमेक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 58.8 डॉलर या 1.3% बढ़कर 4,561.6 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंच गया। हाजिर बाजार में सोना 0.8% बढ़कर 4,538.80 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रहा, जबकि चांदी 4.5% उछलकर 74.90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक और केंद्रीय बैंक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी में जमकर निवेश कर रहे हैं। अमेरिका में संभावित सरकारी शटडाउन की आशंकाओं और नई साल में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदों से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है।