हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार की धारणा कमजोर बनी रही, जिसका असर कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और घरेलू स्तर पर किसी बड़े सकारात्मक संकेत की कमी के रूप में दिखा।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, इटरनल, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और भारती एयरटेल सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन, इंफोसिस और अल्ट्राटेक सीमेंट लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक नीचे दर्ज किया गया। क्रिसमस के उपलक्ष्य में गुरुवार को घेरलू बाजार और अमेरिकी बाजार बंद रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते जैसे नए उत्प्रेरकों के अभाव में, बाजार के मौजूदा स्तरों के आसपास स्थिर रहने की संभावना है।
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) प्रशांत तापसे ने कहा कि कम अवकाशकालीन बिक्री, एफआईआई द्वारा 1,721 करोड़ रुपये की बिकवाली और मजबूत घरेलू संकेतों के अभाव के कारण बाजार सीमित दायरे में और अस्थिर बने हुए हैं, जिससे बाजार का माहौल नाजुक बना हुआ है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.11 प्रतिशत बढ़कर 62.31 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,721.26 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,381.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। बुधवार को सेंसेक्स 116.14 अंक या 0.14 प्रतिशत गिरकर 85,408.70 पर बंद हुआ। निफ्टी 35.05 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 26,142.10 पर आ गया।