पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव ने बाजारों में सोने को कमजोर किया है। सोमवार को सोने का भाव 160 रुपये घटकर 99,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं चांदी 1,05,200 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर स्थिर रही।
आभूषण विक्रेताओं और स्टॉकिस्टों की लगातार बिकवाली के बीच सोमवार को राजधानी दिल्ली सोने की कीमत में गिरावट आई। सोने का भाव 160 रुपये घटकर 99,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 150 रुपए घटकर 99,100 रुपए प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गया। वहीं चांदी का भाव 1,05,200 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर स्थिर रहा। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने इसकी पुष्टि की है।
वैश्विक मोर्चे पर, हाजिर सोना मामूली गिरावट के साथ 3,365.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च की एवीपी कायनात चैनवाला ने कहा कि सोने की कीमत सोमवार को कुछ समय के लिए बढ़कर 3,413.80 डॉलर प्रति औंस हो गई थी, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई है। निवेशक तेहरान पर हवाई हमलों में अमेरिका की भागीदारी के बाद ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। चैनवाला ने कहा कि निवेशक प्रमुख आर्थिक घटनाओं की प्रतीक्षा करेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की कांग्रेस संबंधी गवाही, अमेरिकी जीडीपी डेटा और कोर व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मुद्रास्फीति के आंकड़े शामिल हैं। यह फेडरल रिजर्व के मिले-जुले संदेश के बीच मौद्रिक नीति की दिशा के बारे में नए संकेत दे सकते हैं।
फ्लैश पीएमआई का पड़ेगा असर
कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से फ्लैश पीएमआई आंकड़े जारी होने से वैश्विक आर्थिक स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में नए संकेत मिलने की उम्मीद है। पीएमआई यानी खरीद प्रबंधक सूचकांक, यह एक आर्थिक सूचकांक है जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मापता है। फ्लैश पीएमआई वह रिपोर्ट होती है, जो महीने के अंत से कुछ दिन पहले जारी कर दी जाती है।
आरबीआई की गोल्ड ऋण नीति ने घरेलू स्वर्ण मुद्रीकरण को सहारा दिया
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की शोध विश्लेषक रिया सिंह के अनुसार जून में अब तक सोने की घरेलू कीमतों में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि कमजोर मांग के कारण वैश्विक कीमतों में कमी आ रही है। त्योहारी खरीदारी में सुस्ती के बावजूद, बार और सिक्कों, खास तौर पर 10 ग्राम के सिक्कों की निवेश मांग मजबूत बनी हुई है। यह मुद्रास्फीति की आशंकाओं, ऋण-संबंधी मुद्रीकरण और कम निर्माण लागत के कारण है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की ओर से सोने के बदले ऋण के लिए मानदंडों में ढील दिए जाने के फैसले से घरेलू स्वर्ण मुद्रीकरण को और बढ़ावा मिला है।