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Gold Silver Price: सोना 600 रुपये बढ़कर 100620 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा, चांदी 1500 रुपये उछली

Thu, 21 Aug 2025 06:27 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gold Silver Price: गुरुवार को सोने की कीमत 600 रुपये बढ़कर 1,00,620 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। वहीं चांदी की कीमत 1,500 रुपये बढ़कर 1,14,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई।
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सोना- चांदी का भाव - फोटो : PTI
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विस्तार
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स्टॉकिस्टों की ताजा खरीदारी के बीच राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमत 600 रुपये बढ़कर 1,00,620 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 500 रुपये बढ़कर 1,00,200 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं चांदी की कीमत 1,500 रुपये बढ़कर 1,14,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने इसकी पुष्टि की है। 

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पिछले सत्र में सोने की कीमत तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद सुरक्षित निवेश की मांग और सस्ते दामों पर खरीदारी के कारण गुरुवार को सोने की कीमतों में तेजी आई।
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फेड जोखिमों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने कहा कि सुरक्षित निवेश की नई मांग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा फेडरल रिजर्व गवर्नर के इस्तीफे की मांग के कारण बढ़ी है। इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। गांधी ने कहा कि इस टिप्पणी के बाद अमेरिकी डॉलर अपने हाल के उच्चतम स्तर से नीचे आ गया, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिला।

वैश्विक बाजार में गिरे सोने-चांदी के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में सोना 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,339.04 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। हाजिर चांदी भी 0.32 प्रतिशत गिरकर 37.78 डॉलर प्रति औंस पर आ गयी।

निवेशकों को है अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च, कायनात चैनवाला ने कहा कि सोना 3,340 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर बना हुआ है। निवेशक बेरोजगारी दावों, पीएमआई और मौजूदा घरेलू बिक्री सहित प्रमुख अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, मुख्य ध्यान जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के भाषण पर बना हुआ है, क्योंकि निवेशक मौद्रिक नीति में बदलाव के संकेतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। खासतौर से पिछले साल की टिप्पणियों के बाद, जिसमें दर-कटौती चक्र की शुरुआत का संकेत दिया गया था।
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इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई की बैठक के विवरण से पता चला है कि अधिकारी मुद्रास्फीति और श्रम बाजार के बारे में सतर्क बने हुए हैं। अधिकांश का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती करना अभी जल्दबाजी होगी।

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