अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, स्टॉकिस्टों और खुदरा विक्रेताओं की ताजा बिकवाली के चलते सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ गईं और 1,300 रुपये की गिरावट के साथ 81,100 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली इस बहुमूल्य धातु का भाव गुरुवार को 82,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर था, जो इसका सर्वकालिक उच्च स्तर है।
चांदी भी सोमवार को बिकवाली के दबाव में रही और इसकी कीमत 4,600 रुपये की गिरावट के साथ 95,000 रुपये के स्तर से नीचे 94,900 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। गुरुवार को चांदी 99,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोमवार को वायदा कारोबार में दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के अनुबंध की कीमत 329 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,538 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।
बाजार के जानकारों के अनुसार, "सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया क्योंकि कॉमेक्स सोने को 2,730 अमेरिकी डॉलर के आसपास समर्थन मिला, लेकिन 2,750 अमेरिकी डॉलर से ऊपर जाने में संघर्ष करना पड़ा।"
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी व करेंसी के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा, "अगले दो दिनों में अमेरिकी चुनाव के नतीजे आने वाले हैं, जिससे बाजार सहभागियों में मिश्रित धारणा रहने की उम्मीद है, इसके परिणामस्वरूप एमसीएक्स में कारोबार 78,000 रुपये से 79,000 रुपये के बीच सीमित दायरे में रहने की संभावना है।"
ब्लिंकएक्स और जेएम फाइनेंशियल के शोध (कमोडिटी व करेंसी) के उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, "मुनाफावसूली के कारण सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, क्योंकि व्यापारी अब मांग के मोर्चे पर नए संकेतों की तलाश कर रहे हैं और अमेरिकी चुनाव/फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले तथा वैश्विक बाजार से आने वाले अन्य आंकड़ों जैसे प्रमुख घटनाक्रमों से पहले अपनी स्थिति हल्की रख रहे हैं।"
शेयरखान बाय बीएनपी पारिबा के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (फंडामेंटल करेंसीज एंड कमोडिटीज) प्रवीण सिंह के अनुसार, सोमवार को सोने में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रहा, क्योंकि अमेरिका में गैर-कृषि क्षेत्र में वेतन संबंधी निराशाजनक रिपोर्ट के कारण इसमें तेजी आई। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों और राजकोषीय घाटे में संभावित वृद्धि के कारण प्रतिफल में तेजी के कारण इसमें गिरावट आई।
दूसरी ओर, एशियाई बाजार में कॉमेक्स चांदी वायदा 0.78 प्रतिशत बढ़कर 32.94 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिंह के अनुसार व्यापारियों का मानना है कि दो प्रमुख घटनाओं- अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के परिणाम से पहले सोने की कीमत को एक व्यापक दायरे में मजबूत होना चाहिए।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, "वृहद मोर्चे पर, अमेरिकी फैक्टरी ऑर्डर सोमवार को जारी किए जाएंगे, जिससे सोने में अल्पकालिक अस्थिरता आ सकती है।"
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, उभरते बाजारों में केंद्रीय बैंकों की ओर से खरीद बढ़ा दिए जाने के कारण सोने की कीमत पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2025 के अंत तक इस बहुमूल्य धातु की कीमत 3,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक बढ़ जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की ओर से यूक्रेन पर आक्रमण के बाद 2022 में रूसी केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियों को फ्रीज करने के बाद से उभरते बाजार के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।