मॉर्निंगस्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च तिमाही में भारी बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों ने जून तिमाही के दौरान आकर्षक मू्ल्यांकन के चलते भारतीय इक्विटी में करीब चार अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है।
इन कारकों से मबजूत हुई निवेशकों की धारणा
रिपोर्ट में कहा गया कि लॉकडाउन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों में राहत देने और आर्थिक गतिविधियों को बहाल करने के सरकारी उपायों के चलते विदेशी निवेशकों की धारणा मबजूत हुई। भारतीय इक्विटी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की परिसंपत्तियों में भी जून तिमाही के दौरान तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि इससे पिछले तिमाही के दौरान इसमें भारी गिरावट आई थी।
23 फीसदी अधिक है एफपीआई निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक जून 2020 को खत्म हुई तिमाही के दौरान भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई के निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक जून 2020 के अंत में भारतीय इक्विटी में एफपीआई निवेश लगभग 344 अरब अमरीकी डॉलर था, जो इससे पिछली तिमाही के 281 अरब डॉलर के मुकाबले 23 फीसदी अधिक है।
मॉर्निंगस्टार की रिपोर्ट के अनुसार जून तिमाही के दौरान एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजारों में 3.91 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की, जबकि इससे पिछली तिमाही के दौरान उन्होंने 6.38 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की थी।
क्या है एफपीआई?
बता दें कि जब एक अंतरराष्ट्रीय निवेशक, किसी अन्य देश के उद्यम की निष्क्रिय होल्डिंग में निवेश करता है, यानी वित्तीय परिसंपत्ति में निवेश करता है, तो इसे एफपीआई के रूप में जाना जाता है।
2019 में एफपीआई ने डाले थे 73,276.63 करोड़ रुपये
साल 2019 में एफपीआई ने घरेलू बाजारों (शेयर और ऋण दोनों) में शुद्ध रूप से 73,276.63 करोड़ रुपये डाले थे। बता दें कि जनवरी, जुलाई और अगस्त को छोड़कर एफपीआई साल 2019 के शेष महीनों में शुद्ध लिवाल रहे हैं।