भारत में हुई नोटबंदी का असर भारत से बाहर भी देखा जा रहा है। दुबई का ‘गोल्ड सूक’ सोने के एक प्रमुख बाजार के रूप में माना जाता है, जहां आम तौर पर भारतीयों द्वारा सोने की काफी खरीदारी की जाती है। भारत में नोटबंदी की मार हालांकि इस बाजार पर भी पड़ी है और भारतीय नागरिक इन दिनों यहां खोजने से भी नहीं मिल रहे।
एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बाजार में जिन कारोबारियों के पास सिर्फ एक स्टोर है, उन पर तो नोटबंदी की मार और भी अधिक गहरी पड़ी है। स्काई ज्वेलरी के महाप्रबंधक सिरियक वर्गीज ने कहा कि आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद जिस तरह से भारत में सोने की खरीदारी घट गई है, ठीक वैसा ही नजारा यहां भी दिख रहा है।
गल्फ न्यूज में वर्गीज के हवाले से कहा गया है कि गोल्ड सूक से बाहर दूसरे बाजारों में भी जैसे कि बर दुबई में भी भारतीय यात्रियों में खरीदारी को लेकर विशेष उत्साह नहीं देखा जा रहा है।किसी भी अच्छे वर्ष में इस बाजार में होने वाली खरीदारी में भारतीय यात्रियों द्वारा की जाने वाली खरीदारी का 15-20 फीसदी योगदान होता है। यदि सोने की कीमतों में गिरावट चल रही हो, जैसा कि पिछले सप्ताह हुई, तो यह भारतीयों द्वारा की जाने वाली खरीदारी का अनुपात और बढ़ जाता है।
चीन के यात्रियों से हो रही थोड़ी भरपाई
Gold
रिटेल बाजार के सूत्रों के मुताबिक भारतीय यात्रियों की अनुपस्थिति की भरपाई कुछ हद तक चीन के यात्रियों से हो रही है, जो हाल के कुछ सप्ताहों में सोने की खरीदारी के मामले कुछ अधिक सक्रिय देखे जा रहे हैं। उनके द्वारा की जा रही खरीदारी हालांकि भारतीय यात्रियों के द्वारा की जाने वाली खरीदारी के सामने तुलना करने योग्य नहीं है।
चीन के यात्री 18 कैरेट वाले सोने को अधिक पसंद करते हैं, जबकि भारतीय यात्री 22 कैरेट वाले सोने को तरजीह देते हैं। दुबई गोल्ड एंड ज्वेलरी ग्रुप के बोर्ड सदस्य अब्दुल सलाम केपी ने कहा कि साधारण स्थिति होती तो भारत से यात्री दुबई आते। उनके पास भारतीय मुद्रा में काफी राशि होती।
वे इसे दुबई की मुद्रा में बदलते और उसके बाद उस रकम से आभूषण खरीदते। उन्होंने कहा कि अब नोटबंदी के बाद अतिरिक्त नकदी उपलब्ध नहीं है और अपने अघोषित धन से जो कोई भी कुछ भी कर सकता था, उन क्षेत्रों में भी गतिविधि ठप्प है।
नहीं बदले जा रहे पुराने नोट
Gold dress
दुबई की मुद्रा विनिमय कंपनियां ऐसे किसी भी व्यक्ति को मदद नहीं दे रहीं, जिनके पास बंद हो चुके पुराने भारतीय नोट हैं। जॉय अलुक्कास ग्रुप के निदेशक एंटनी जोस ने कहा कि नोटबंदी से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है।
इसके देखते हुए हम चलन से हटाए जा चुके नोट न तो स्वीकार कर रहे हैं और न ही बदल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि काला धन और जाली नोटों के विरुद्घ अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी। इसके तहत 1,000 रुपये और 500 रुपये के पुराने नोट की वैधता समाप्त कर दी गई थी।
नागरिकों को ये नोट बैंकों में जमा करने और इन्हें अन्य पुराने नोटों या नए जारी हुए नोटों से बदलने का निर्देश दिया गया था। इस कदम के बाद बाजार में नकदी किल्लत पैदा हुई है और इसके कारण कई क्षेत्रों में बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ा है।