सरसों वैज्ञानिक व सरसों तेल के उत्पादकों के मुताबिक इस साल अब तक की स्थिति को देखते हुए पिछले साल के मुकाबले सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
सरसों तेल उत्पादकों का मानना है कि सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने पर निश्चित रूप से सरसों तेल के दाम में कमी आएगी। पिछले साल नवंबर में त्यौहारी सीजन के दौरान ब्रांडेड सरसों तेल के दाम 150 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गए थे।
मस्टर्ड रिसर्च प्रमोशन कंसोर्टियम (एमआरपीसी) की वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रज्ञा गुप्ता के मुताबिक सरसों की बुआई व फसल स्थिति इस समय काफी बेहतर है। इस समय सरसों की फसल के लिए मौसम-पानी की स्थिति अच्छी बनी हुई है। यद्यपि सर्दी का कम होना थोड़ी चिंता की बात है।
सरसों की बुआई बढ़ी
गुप्ता के मुताबिक पंजाब-हरियाणा में बुआई पिछले साल के मुकाबले कुछ बढ़ी
है, लेकिन राजस्थान में पांच-दस फीसदी कम हुई है। इस साल 31 दिसंबर तक देश
भर में पिछले साल के मुकाबले लगभग 5-6 प्रतिशत कम बुआई हुई है।
उन्होंने
बताया कि पिछले साल बारिश और ओले गिरने से सरसों की 10-20 फीसदी फसल खराब
हुई थी। इस साल सरसों की बोआई 5-6 फीसदी कम आंकी जाए तो भी फसल पिछले साल
की तुलना में थोड़ी ज्यादा आ सकती है।
पुरी आयल मिल्स के प्रबंध निदेशक
विवेक पुरी ने बताया कि जनवरी में हमेशा सरसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव
होता है।
तेल की कीमतों में लगातार गिरावट
पिछले कुछ दिनों में भी सरसों तेल की कीमतों में लगातार गिरावट
रही है और आने वाले दिनों में भी इसमें कमजोरी रहेगी क्योंकि नई सरसों की
फसल फरवरी के दूसरे हफ्ते के बाद बाजार में आ सकती है। उन्होंने कहा कि
पिछले कुछ महीनों में सरसों तेल की कीमतें काफी ज्यादा रहीं हैं और इसका
असर खपत पर पड़ा है।
एमआरपीसी के मुताबिक इस साल सरसों में फूल लगने
के बाद फल भी आने लगे हैं। पिछले साल की तुलना में पौधों में फली की
मात्रा 10-15 फीसदी ज्यादा देखने को मिल रही है।
देश में प्रमुख सरसों
उत्पादक राज्यों में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान
आता है जबकि अकेले राजस्थान का कुल उत्पादन में 50 फीसदी का योगदान है।