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एतिहासिक गिरावट के बाद अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत में आया उछाल

Wed, 22 Apr 2020 01:19 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
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अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत के शून्य से नीचे चले जाने के बाद बुधवार को इसमें उछाल देखने को मिला। कोरोना वायरस महामारी के चलते मांग में अप्रत्याशित कमी के चलते कच्चे तेल पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। 

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अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का भाव जून डिलीवरी के लिए करीब 10 फीसदी चढ़कर 12.68 डॉलर प्रति बैरल पर था। एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें लगभग 20 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। 

इससे पहले सोमवार को मई डिलीवरी के लिए डब्ल्यूटीआई नकारात्मक 40.32 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मंगलवार को सौदा खत्म होने से पहले कारोबारियों को इसे बेचना था, लेकिन भंडारण क्षमता नहीं होने के कारण उन्हें चंद खरीदार ही मिल सके। नकारात्मक कीमतों का मतलब है कि कारोबारियों को तेल देने के साथ ही भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 
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18 साल के निचले स्तर पर ब्रेंट क्रूड 
यूरोपीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में जून डिलीवरी के लिए दो फीसदी से अधिक का उछाल देखने को मिला, हालांकि बाद में इसने अपनी बढ़त गंवा दी और यह तीन फीसदी गिरावट के साथ 18.73 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था। पिछले दिन यह 18 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। 

कोरोना संकट से आई कच्चे तेल की मांग में कमी
कोरोना वायरस संकट के कारण कच्चे तेल की मांग में कमी आई है और तेल की सभी भंडारण सुविधाएं भी अपनी पूर्ण क्षमता पर पहुंच चुकी हैं। इस संदर्भ में एसएंडपी ग्लोबल प्लैट्स के मुख्य विश्लेषक क्रिस एम ने कहा था कि, तीन सप्ताह के भीतर कच्चे तेल के सभी टैंक भर जाएंगे। 

ओपेक, अन्य देशों ने तेल बाजार पर की चर्चा
कच्चे तेल के दाम रसातल पर पहुंचने के बीच तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक ने कहा है कि उसके सदस्य देशों के कई मंत्रियों और ओपेक के कुछ अन्य सहयोगियों ने मंगलवार को टेलीकॉन्फ्रेंसिंग की है। इस दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम पर चर्चा की गई। इस संदर्भ में ओपेक ने ट्वीट कर कहा है कि सदस्यों ने तेल बाजार की मौजूदा अप्रत्याशित स्थिति पर गहन चर्चा की। हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने इसमें भाग लिया या नहीं।

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