सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज(सीडीएसएल) और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (एनएसडीएल )ने निवेशकों को लिए अपने निवेशक एप में नई सुविधाएं पेश की है, इससे शेयरधारक कंपनी मामलों पर मतदानत करते समय उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों को आसान बनाएगा।
यह एप निवेशकों को सीडीएसएल के MyEasi एप और एनएसडीएल के Speed-e एप पर उपलब्ध है। यह प्रॉक्सी सलाहकार फर्मों की सिफारिशों और सलाहों को सीधे ई-वोटिंग प्लेटफॉर्म में एकीकृत करता है। यह सुविधा 7 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। निवेशकों को इससे मुख्य सुविधा यह होगी कि वे अब कॉरपोरेट प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की सलाह देख सकते हैं। इसके लिए अब शेयरधारकों को अलग-अलग वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
इससे उनकों अपने वोट डालने मदद भी मिलेगी। यह एप्स सेबी की निगरानी में है। इससे पहले इस तरह की सुविधा प्रमुख रूप से संस्थागत निवेशकों के लिए ही उपलब्ध थी। जबकि रिटेल निवेशकों को मतदान से पहले सलाह और सिफारिशों के लिए अनेक प्रॉक्सी सलाहकार फर्मों की वेबसाइट पर जाना पड़ता था। इससे एप के जरिए सभी छोटे बड़े शेयरधारक विशेषज्ञ द्वारा दी गई सलाह को देख सकेंगे और उचित निर्णय ले सकेंगे।
इस अवसर पर छोटे बड़े सभी निवेशकों को कैपिटल मार्केट के बारे में जानकारी देने के लिए माइक्रो साइट को भी शुरू किया गया। यह वेबसाइट 7 क्षेत्रिय भाषाओं में उपलब्ध है, जहां कैपिटल मार्केट, निवेश के बारे में पूरी जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ती युवा निवेशकों और महिलाओं को बाजार के सही जानकारी और उनके निवेश को अधिक आसान बनाना है।
इस पहल में स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज, इंस्टीट्यूशन इंवेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज (आईआईएएस) और इन गवर्न रिसर्च तीन फर्म की हिस्सेदारी है। यह फर्म कंपनी प्रबंधन द्वारा पेश किए गए प्रस्तावों को पेशवर मूल्यांकन की सुविधा देती है, जिससे निवेशकों को उनके वोटों की मूल्य समझने में मदद मिलती है।
इन दोनों एप के लॉन्च के अवसर पर सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बताया कि यह पहल रिटेल निवेशकों को सशक्त बनाने की ओर बड़ा कदम है। शेयरधारक वोटिंग कंपनी प्रबंध को जवादेह बनाने रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका है और सामूहिक रिटेल निवेशक भागीदारी शक्तिशाली हो सकती है। पांडे कहा कि सेबी ई-वोटिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए काम कर रहा है, जिसे पहले बहुत जटिल और समय लेने वाली थी, इस एकीकृत और सुविधाजन एकल लॉगिन प्रणाली के साथ यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में देश में 72 प्रतिशत डीमैट खाते 18 से 35 वर्ष के युवाओं द्वारा खोले गए हैं, वहीं 80 प्रतिशत डीमैट खाते टियर 1 और टियर 2 यानी छोटे शहरों से जुड़े हैं। जबकि 39 प्रतिशत डीमैट खाते महिलाओं के हैं, जो कि 26 से 45 वर्ष की है। इससे यह पता चलता है कि बाजार के बारे में सही जानकारी मुहैया करवाना कितना जरूरी है। डिजिटल होने की वजह से निवेश करना आसान हुआ है, जिसकी वजह से निवेशक छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से जुड़ रहे हैं।