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सरकारी बैंकों में जान फूंकने के लिए सरकार देगी 25,000 करोड़

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सरकारी बैंकों के फंसे एनपीए को दूर करने और उनको ज्यादा मजबूत बनाने के लिए बजट में नया फंड आवंटित करने की घोषणा की है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2016-17 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि 'वित्तीय कंपनियों के वियोजन पर व्यापक संहिता को लागू किया जाएगा।
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ऐसा करने से दिवालिया और दिवालियापन कानून के साथ इस कोड़ से बड़े क्रमबद्ध खाली स्थान की भरपाई होगी। यह एक बड़ा सुधार करने वाला कदम है। मौद्रिक नीति ढांचे को सांविधिक आधार उपलबध कराया जाएगा और वित्त विधेयक 2016 के तहत मौद्रिक नीति का गठन किया जाएगा।

परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनियों को मजबूत बनाने के लिए सारफेसी अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति सुधारने की योजना की भी घोषणा की है। आपको बताते चले कि सरकारी बैंकों का एनपीए बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का हो गया है।
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मुद्रा योजना: 1.80 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्‍ताव

सुप्रीम कोर्ट ने भी आरबीआई को पिछले दिनों निर्देश जारी करते हुए कहा था कि 500 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन वाले डिफॉल्टरों की सूची जल्द से जल्द हमें उपलब्‍ध कराए। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत स्‍वीकृत राशि का लक्ष्‍य बढ़ाकर 1.80 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्‍ताव है।

पारदर्शिता, जवाबदेही और निपुणता में सुधार लाने के लिए कंपनियों को स्‍टॉक एक्‍सचेंजों में सूचीबद्ध किया जाएगा। गैर-कानूनी जमावर्ती योजनाओं से निपटने के लिए व्‍यापक केन्‍द्रीय कानून तैयार किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में वित्‍तीय सेवाओं की बेहतर पहुंच उपलब्‍ध कराने के लिए सरकार अगले तीन वर्षों के दौरान डाकघरों में एटीएम और माइक्रो एटीएम की बड़ी राष्‍ट्रव्‍यापी योजना शुरू करेंगी।
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