अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी तेजी दर्ज की गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में गतिरोध और ईरानी बंदरगाहों व निर्यात पर अमेरिका की लंबी नाकेबंदी की चिंताओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से यह भारी उछाल आया है।
लगातार बढ़ते इन तेल दामों का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है, जहां कंपनियों के मुनाफे और कॉरपोरेट मार्जिन पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
आपूर्ति संकट और यूएई का ओपेक से किनारा
आपूर्ति के मोर्चे पर स्थिति और जटिल होती जा रही है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते अपने जहाजों को छोड़कर बाकी सभी शिपिंग को रोक दिया है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी इसी महीने से ईरानी जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर दी है।
इस बीच, एक बड़ा रणनीतिक बदलाव यह हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) 1 मई से ओपेक (OPEC) और ओपेक+ (OPEC+) गठबंधन से बाहर निकल रहा है। इस कदम से कीमतों को नियंत्रित करने की ओपेक की क्षमता कमजोर होने की आशंका है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार रविवार को होने वाली बैठक में ओपेक+ देश तेल उत्पादन कोटा में लगभग 1,88,000 बैरल प्रतिदिन की मामूली वृद्धि पर सहमति जता सकते हैं।